जेन जी को धर्म-जाति की नहीं मुद्दों की राजनीति पसंद है, NDTV YUVA 2026 में बोले रोहित पवार

मुंबई: 

मुंबई में NDTV की ओर से आयोजित YUVA 2026 महाराष्ट्र के कर्जत-जामखेड से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एससी पवार) के विधायक रोहित पवार शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी अब राजनीति में सिर्फ दर्शक की भूमिका में नहीं रहना चाहती, बल्कि वह नेताओं से सवाल पूछ रही है. उन्होंने कहा कि जेन जी कही जा रही आज की युवा पीढ़ी नेताओं से मुद्दों पर स्पष्ट जवाब चाहती है. उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को नेताओं का दिखावा पसंद नहीं है. वो केवल मुद्दों पर स्पष्टता चाहते हैं. उन्होंने परिवारवाद के सवाल पर कहा कि सफलता केवल परिवार से नहीं मिलती आपको भी काम करके दिखाना होता है. उन्होंने कहा कि वो अपने परिवार के ऐसे पहले सदस्य हैं, जिसने भूख हड़ताल किया और आंदोलन करते हुए सड़क पर सोया. 

रोहित पवार ने कहा कि राजनीतिक दलों और नेताओं को Gen-Z की सोच को समझने की कोशिश करनी चाहिए. उनके मुताबिक, युवा सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों के जरिए नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखते हैं. इसलिए अगर कोई नेता केवल युवाओं के बीच लोकप्रिय दिखने के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय होता है या उनके बीच अपनी मौजूदगी दिखाने की कोशिश करता है, तो युवा इसे आसानी से पहचान लेते हैं.

उन्होंने कहा कि युवाओं को प्रभावित करने के लिए किसी नेता का वास्तव में उनके मुद्दों से जुड़ना जरूरी है. शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़ी नीतियों जैसे विषयों पर अगर कोई नेता गंभीरता से काम करता है, तो युवा उसका समर्थन कर सकते हैं.

आज की जेन जी को कैसी राजनीति पसंद है 

पवार ने कहा कि युवा अब 'इश्यू बेस्ड पॉलिटिक्स' को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. उनके मुताबिक, नेता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि शिक्षा व्यवस्था में वह क्या बदलाव लाना चाहता है, रोजगार के लिए उसकी क्या योजना है और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर उसकी क्या नीति और राय है. उन्होंने कहा कि आज राजनीति में जाति और धर्म आधारित मुद्दों पर ज्यादा जोर दिया जाता है, लेकिन युवाओं की अपेक्षा इससे अलग है. उन्होंने NEET पेपर लीक का हवाला देते हुए कहा कि अगर सरकार से कोई गलती हुई है तो उसे स्वीकार करना चाहिए और यह बताना चाहिए कि भविष्य में ऐसी गलती रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे.

पवार ने कहा कि युवा नेताओं से यह उम्मीद करते हैं कि वे अपनी पार्टी के फैसलों पर भी जरूरत पड़ने पर सवाल उठाएं. उन्होंने कहा कि अगर किसी पार्टी का कोई फैसला जनता को पसंद नहीं आया है तो नेता में यह कहने की हिम्मत होनी चाहिए कि उस फैसले में बदलाव की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि युवा नेताओं की 'गोलमोल' या अत्यधिक कूटनीतिक भाषा को पसंद नहीं करते. उनके मुताबिक, किसी मुद्दे पर नेता को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए कि वह उसके पक्ष में है या विरोध में.

जाति और धर्म की जगह शिक्षा-रोजगार पर हो बात 

महाराष्ट्र में मराठा और ओबीसी आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीति पर पूछे गए सवाल के जवाब में रोहित पवार ने कहा कि राज्य में जाति आधारित राजनीति पहले से मौजूद रही है, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह ज्यादा प्रमुख हुई है. उन्होंने इसके पीछे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि संकट को भी एक कारण बताया. पवार के मुताबिक, परिवार बढ़ने के साथ खेती की जमीन छोटी होती गई और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक समस्याएं बढ़ीं. ऐसे में लोगों को लगने लगा कि आरक्षण की कमी के कारण उन्हें शिक्षा, रोजगार और दूसरी सुविधाओं में अवसर नहीं मिल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि वास्तविक समस्या रोजगार और शिक्षा की गुणवत्ता है. उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में युवाओं के पास डिग्री तो है, लेकिन रोजगार के लिए जरूरी कौशल नहीं हैं. उन्होंने दावा किया कि रोजगार और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो युवाओं में बढ़ता असंतोष सामाजिक अस्थिरता का कारण बन सकता है.

परिवारवाद पर क्या बोले रोहित पवार

महाराष्ट्र के सबसे बड़े राजनीतिक परिवारों में से एक पवार परिवार से आने और राजनीति में परिवारवाद के आरोपों पर रोहित पवार ने कहा कि राजनीतिक परिवार से आने वाले व्यक्ति को शुरुआती स्तर पर एक प्लेटफॉर्म जरूर मिल जाता है. उन्होंने माना कि उन्हें भी राजनीतिक परिवार से होने का फायदा मिला है.
हालांकि उन्होंने कहा कि लंबे समय तक राजनीति में बने रहने के लिए व्यक्ति को अपने काम और लोगों के भरोसे के आधार पर आगे बढ़ना पड़ता है. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन किए और सड़क पर उतरकर संघर्ष किया. पवार ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि उनके परिवार में किसी ने भूख हड़ताल नहीं की, लेकिन उन्होंने की, मेरे दादा ने करीब 400 किमी की पदयात्रा की लेकिन मैं करीब आठ सौ किमी पैदल चला और आंदोलन के दौरान मेरे परिवार को कोई सदस्य सड़क पर नहीं सोया. लेकिन मैं सोया. 

रोहित पवार ने कहा कि राजनीति में आने का उनका फैसला अपनी इच्छा से था और उनका लक्ष्य सिर्फ विधायक बनना नहीं है. उन्होंने कहा कि बड़े राजनीतिक लक्ष्य हासिल करने के लिए जनता का विश्वास हासिल करना और उनके मुद्दों के लिए संघर्ष करना जरूरी है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार और अजित पवार गुटों के भविष्य में फिर एक साथ आने के सवाल पर रोहित पवार ने कहा कि दोनों गुटों के साथ आने की संभावना हो सकती है, लेकिन इसके लिए अजित पवार गुट को बीजेपी का साथ छोड़ना होगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए सत्ता और मंत्री पद छोड़ने की हिम्मत दिखानी होगी और विपक्ष में रहकर संघर्ष करना होगा. 

अजित पवार विमान हादसे की जांच की मांग

बातचीत के दौरान रोहित पवार ने अजित पवार की विमान दुर्घटना को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि हादसा दुर्घटना था या इसके पीछे कोई साजिश थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है. हालांकि उन्होंने दावा किया कि इस मामले में पर्याप्त जांच नहीं होने के कारण संदेह बना हुआ है.
उन्होंने एफआईआर दर्ज करने और मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है. पवार ने कहा कि विमान दुर्घटना की तकनीकी जांच और आपराधिक जांच अलग-अलग पहलू हैं और दोनों की जांच जरूरी है. उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति या कंपनी की लापरवाही दुर्घटना के लिए जिम्मेदार पाई जाती है और इसके बावजूद उसे बचाने की कोशिश होती है, तो यह गंभीर मामला होगा. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वास्तव में ऐसा हुआ है या नहीं, यह जांच से ही स्पष्ट होगा.

पवार ने कहा कि वह इस मामले से जुड़ी जानकारी और अपने स्तर पर की गई जांच को लेकर 10 अक्टूबर को मुंबई में एक प्रस्तुति देने वाले हैं. उन्होंने दावा किया कि इस दौरान वह एक ऐसे व्यक्ति का नाम सामने रखेंगे, जिसके बारे में उनका आरोप है कि वह VSR कंपनी को बचा रहा है. उन्होंने कहा कि इस मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के जरिए होनी चाहिए.

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