किसी भक्त के लिए मंदिर में पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक वह भगवान को फूल औऱ प्रसाद का चढ़ावा ना चढ़ाए. ऐसा अनुमान है कि देश के विभिन्न मंदिरों, दरगाहों औऱ गुरुद्वारों में चढ़ावे के तौर पर लगभग 80 करोड़ टन फूल का इस्तेमाल होता है. देखिए, आखिर ये लोग कैसे इस कचरे को संसाधन के तौर बदलकर नदियों को प्रदूषित होने से बचा रहे हैं.
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