
NDTV AI Summit 2026: इंटरनेट के बाद AI दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बन चुकी है. जैसे-जैसे और ज्यादा ताकतवर AI सिस्टम बनाए जा रहे हैं, वैसे-वैसे यह सवाल भी उठता है कि क्या इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं. आमतौर पर नई तकनीक के आने पर सुरक्षा, गलत इस्तेमाल, नौकरी पर असर या कंट्रोल खोने का डर जैसी चिंताएं सामने आती हैं. इसी को लेकर OpenAI के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर क्रिस लेहेन ने NDTV India.AI Summit के एक सेशन में, जिसे NDTV के एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल और पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ श्वेता राजपाल कोहली ने मॉडरेट किया, यह बताया कि AI के इंसानों के कंट्रोल से बाहर जाने की संभावना के बारे में उनका क्या नजरिया है.
इस सवाल का जवाब देते हुए क्रिस लेहेन ने बताया 'हम इस मुद्दे को थोड़ा ज्यादा सकारात्मक नजरिये से देखते हैं. हम हकीकत को समझते हैं, इसलिए किसी भी मॉडल को सार्वजनिक करने से पहले उसमें तरह-तरह की सुरक्षा व्यवस्थाएं जोड़ते हैं. और जैसा सैम ऑल्टमैन अक्सर कहते हैं, और आप उनसे यह सुनेंगे भी, कि समाज को भी अपनी तरफ से किस तरह मजबूत और तैयार होना चाहिए, इस पर काम करना जरूरी है'

उन्होंने कहा, 'मैं आपको एक उदाहरण देता हूं. अमेरिका में पहले इसे AI Safety Institute कहा जाता था, अब इसका नाम CAISI है. इसी तरह के संस्थान यूके, जापान और सिंगापुर में भी मौजूद हैं, और भारत भी ऐसा मॉडल बनाने पर विचार कर रहा है'. इसके साथ ह OpenAI अधिकारी ने बताया कि ऐसे सेफ्टी इंस्टीट्यूट्स का काम ग्लोबल स्टैंडर्ड तैयार करना हैताकि एआई मॉडल जारी करते समय उन गंभीर खतरों से निपटा जा सके, जैसे कि AI के बेकाबू होने की संभावना.
लेहेन ने कहा, 'इसी वजह से हमारे नजरिये में डेमोक्रेटिक AI बनाना भविष्य के लिए बेहद जरूरी है. आपको ऐसे वैश्विक सुरक्षा मानक तैयार करने होंगे जिनके आधार पर पूरी दुनिया काम कर सके. और जब आप ऐसा करते हैं, तो आप समाज को बेहतरीन तकनीक भी देते हैं, ताकि वे मजबूत बन सकें और उन लोगों का मुकाबला कर सकें जो एआई का गलत इस्तेमाल करना चाहते हैं.'
राजधानी दिल्ली के ITC Maurya में आयोजित NDTV India.AI Summit 2026 के इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और उद्योग जगत के लीडर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर गहन चर्चा कर रहे हैं.
