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AI बना 'नई दौलत' का फॉर्मूला, जिसने लगाए पैसे, फर्श से अर्श पर पहुंचा, आंकड़ों और दिग्‍गजों से समझिए पूरी कहानी

AI बना 'नई दौलत' का फॉर्मूला, जिसने लगाए पैसे, फर्श से अर्श पर पहुंचा, आंकड़ों और दिग्‍गजों से समझिए पूरी कहानी
It's Time to Invest in AI: क्‍यों एआई में इन्‍वेस्‍ट करना है फायदे का सौदा?

Highlights

  1. AI ने पारंपरिक निवेश विकल्पों को पीछे छोड़ते हुए कंपनियों की वैल्यूएशन और कमाई में तेजी से वृद्धि की है
  2. भारत में बड़े IT कॉरपोरेट्स और मिड-कैप कंपनियां AI को अपने बिजनेस मॉडल में तेजी से शामिल कर रही हैं
  3. भारत में अगले दो वर्षों में AI और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में 200 बिलियन डॉलर से अधिक निवेश करने का प्‍लान है

NDTV Ind.ai Summit Takeaways: एक समय था जब निवेश की बात आते ही लोग सोना, चांदी या रियल-एस्टेट का नाम लेते थे. लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. जमाना AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का है. और पिछले कुछ समय में जिसने जितनी जल्‍दी AI की वैल्‍यू समझी और निवेश किए, वे बहुत आगे निकल आए हैं. AI ने कंपनियों की वैल्यूएशन, कमाई और निवेशकों की दौलत को जिस रफ्तार से बढ़ाया है, उसने पारंपरिक एसेट्स को पीछे छोड़ दिया है. भारत से लेकर अमेरिका और यूरोप तक, जिन कंपनियों और निवेशकों ने समय रहते AI पर दांव लगाया, वे कुछ ही सालों में 'फर्श से अर्श' तक पहुंच गए. NDTV केInd.ai समिटमें भी ये बात निकल कर सामने आई. AI में निवेश करने वाले भारतीय दिग्‍गजों से लेकर ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स तक, समिट में पहुंचे तमाम एक्‍सपर्ट्स ने AI में निवेश को वर्तमान की 'जरूरत' और भविष्‍य की 'दौलत' बताया.  

ग्लोबल रिसर्च के मुताबिक 2025 में करीब 390 बिलियन डॉलर का AI बाजार 2033 तक 3.4 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो सकता है. यानी आने वाले दशक में AI सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि सबसे बड़ा आर्थिक इंजन बनने जा रहा है.
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NDTV Ind.ai Summit में पहुंचे देश और दुनिया के दिग्‍गजों ने एआई के बढ़ते महत्‍व, संभावनाओं और जोखिम पर चर्चा की. 

भारत में AI: कंपनियां और निवेशक कैसे बना रहे दौलत?

भारत में AI अब सिर्फ स्टार्टअप ट्रेंड नहीं रहा, बल्कि बड़े कॉरपोरेट और सरकार दोनों इसे भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार मान रहे हैं. बड़े-बड़े IT और टेक प्‍लेयर्स की वैल्यूएशन में जबरदस्‍त उछाल देखा गया है.

NDTV AI Summit में सामने आए डेटा के मुताबिक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस(Infosys), एचसीएलटेक (HC ec), विप्रो (Wipro) और टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) जैसी कंपनियां अपने बिजनेस में AI और जेनरेटिव AI को तेजी से जोड़ रही हैं. वहीं मिड-कैप कंपनियां जैसे Persistent Systems, Coforge, LTIMindtree और Happiest Minds भी ऑटोमेशन और क्लाउड मॉडर्नाइजेशन में AI का इस्तेमाल कर रही हैं.

AI-आधारित काम की वजह से इन कंपनियों को निवेशकों से प्रीमियम वैल्यूएशन मिल रहा है. उदाहरण के तौर पर, इंफोसिस के एक AI सहयोग की घोषणा के बाद शेयरों में करीब 4% की तेजी देखी गई. ये दिखाता है कि बाजार AI-फोकस्ड कंपनियों को ज्यादा महत्व दे रहा है.

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एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर कई बिलियन डॉलर का दांव

भारत सरकार और निजी कंपनियां भी बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं. केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने NDTV से कहा कि अगले दो वर्षों में AI और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में 200 बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है. उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्लोबल AI इंडेक्स का हवाला देते हुए बताया कि AI क्षमताओं में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है. अदाणी ग्रुप ने भी 2035 तक 100 बिलियन डॉलर के AI डेटा सेंटर बनाने का प्लान घोषित किया है, जिससे सर्वर मैन्युफैक्चरिंग और क्लाउड सेक्टर में अतिरिक्त 150 बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित हो सकता है. इस लिस्‍ट में और भी ढेरों कंपनियां और इन्‍वेस्‍टर्स हैं. 

भारत AI स्टैक की सभी लेयर में मजबूत स्थिति में है और आने वाले दो वर्षों में डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर व AI से जुड़े निवेश 200 अरब डॉलर से अधिक पहुंच सकते हैं. देश को ग्लोबल साउथ के लिए एक भरोसेमंद AI पार्टनर माना जा रहा है. सरकार निजी कंपनियों के साथ मिलकर स्किलिंग, डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत कर रही है ताकि भारत सिर्फ AI यूजर नहीं बल्कि डेवलपर और इनोवेशन हब के रूप में उभरे.

अश्विनी वैष्णव

केंद्रीय आईटी मंत्री, भारत सरकार

AI से सीधी कमाई: बिजनेस मॉडल बदल रहा

फाइनेंस सेक्टर में बजाज फाइनेंस ने AI-एनालिटिक्स से करीब 1,600 करोड़ रुपये की कमाई की और करोड़ों कस्टमर कॉल्स का AI के जरिए एनालिसिस शुरू किया. इससे यह साफ है कि AI सिर्फ भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि आज की रेवेन्यू मशीन बन चुका है.

स्टार्टअप और निवेशक: नए 'AI यूनिकॉर्न' की तैयारी

Activate नाम का 75 मिलियन डॉलर का AI वेंचर फंड लॉन्च करने वाले निवेशक आकृत वैष ने NDTV AI Summit में कहा कि फंडिंग अब उन कंपनियों में जा रही है जो AI-नेटिव प्रोडक्ट बना रही हैं. वहीं Together Fund के मानव गर्ग के मुताबिक, Emergent AI दुनिया में इस सेक्टर की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली कंपनियों में शामिल हो गई है. इसने लॉन्च के कुछ ही महीनों में 100 मिलियन डॉलर का वार्षिक रेवेन्यू हासिल कर लिया- जो इस सेक्टर की तेज ग्रोथ का संकेत है. 

भारत का सर्वम (Sarvam AI) ने पूरी दुनिया का ध्‍यान अपनी ओर खींचा है.

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एक्सपर्ट व्यू: AI कैसे बदल रहा बिजनेस और रोजगार

NVIDIA के ग्लोबल एग्जीक्यूटिव जय पुरी ने NDTV AI Summit में कहा कि AI कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाकर मुनाफा और नौकरी दोनों बढ़ा सकता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हेल्थकेयर में AI डॉक्टरों को बेहतर डायग्नोसिस और डेटा एक्सेस देगा, जबकि भारत में यह किसानों और छोटे व्यवसायों तक सेवाएं पहुंचाने में मदद करेगा. Zoho के को-फाउंडर श्रीधर वेंबू का मानना है कि भारत की युवा आबादी और तेज AI अपनाने की क्षमता देश को वैश्विक AI रेस में आगे ले जा सकती है.

वहीं, Wikipedia के सह-संस्थापक जिमी वेल्स ने AI के भविष्य को लेकर आशावाद जताया, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि AI द्वारा बनाए गए कंटेंट की सत्यता जांचने के लिए मानव निगरानी जरूरी है. उनके मुताबिक भारत की युवा और बहुभाषी आबादी AI के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकती है.

Z47 के विक्रम वैद्यनाथन ने कहा कि AI की असली ताकत तब दिखेगी जब इसकी लागत कम होकर बड़े पैमाने पर उपलब्ध होगी. Prosus के आशुतोष शर्मा ने इसे तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी बताते हुए कहा कि हर सेक्टर में AI का असर दिखेगा और उद्यमियों को इस बदलाव के साथ खुद को ढालना होगा.

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दुनिया में AI: ट्रिलियन डॉलर वैल्यूएशन का नया दौर

AI की असली ताकत ग्लोबल मार्केट में दिख रही है, जहां कुछ कंपनियों की वैल्यूएशन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. मार्केट डेटा के अनुसार, NVIDIA की मार्केट कैप करीब 4 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गई है. माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट (गूगल), अमेजन और मेटा जैसी कंपनियां भी ट्रिलियन डॉलर क्लब में हैं और उनकी ग्रोथ का बड़ा कारण AI रणनीति है. वहीं हाल ही में अपने क्‍लाउड मॉडल से आईटी कंपनियों के बीच खलबली मचाने वाले अमेरिकी AI स्टार्टअप Anthropic की वैल्यूएशन कुछ ही महीनों में तेजी से बढ़कर सैकड़ों बिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जबकि OpenAI की वार्षिक आय कुछ सालों में जीरो से बढ़कर बिलियनों डॉलर में पहुंच गई

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निवेश का पैमाना, इतिहास से भी बड़ा

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने NDTV AI Summit में कहा कि AI पर कंपनियां इतना पैसा खर्च कर रही हैं, जो ऐतिहासिक मैनहटन प्रोजेक्ट से 20 गुना ज्यादा है. उनके मुताबिक AI एक 'जनरल पर्पस टेक्नोलॉजी' है, जो पूरी अर्थव्यवस्था को बदल सकती है. उन्होंने कहा कि AI पूरे देश को एक नया आकार दे सकता है. AI पर बहस अब टेक्नोलॉजी के स्तर से बढ़ कर इससे जुड़ी रणनीतियों की ओर बढ़ गई हैं. उन्होंने कहा कि AI पूरे देश को एक नया आकार दे सकता है. वे बोले कि AI पर बहस अब टेक्नोलॉजी के स्तर से बढ़ कर इससे जुड़ी रणनीतियों की ओर बढ़ गई हैं.

AI बना बेहतर निवेश, बढ़ती जा रही ग्लोबल डिमांड 

AI फंडिंग 250 बिलियन डॉलर से ज्यादा पार कर चुकी है. एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया के टॉप यूनिकॉर्न्स में करीब 43% वैल्यू AI कंपनियों की है. हेल्थकेयर, बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर AI पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं.

  1. तेज रिटर्न और स्केल: सोना और रियल-एस्टेट से तुलना करें तो ये पारंपरिक एसेट्स आमतौर पर धीमी गति से बढ़ते हैं, जबकि AI कंपनियां कुछ ही सालों में कई गुना वैल्यू बना रही हैं.
  2. हर सेक्टर में इस्‍तेमाल: AI सिर्फ टेक कंपनी तक सीमित नहीं है. फाइनेंस, हेल्थ, खेती, ई-कॉमर्स और शिक्षा तक हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल हो रहा है. इससे निवेश का दायरा भी फैल जाता है.
  3. सरकारी और वैश्विक समर्थन: सरकारें टैक्स छूट, डेटा सेंटर और रिसर्च प्रोग्राम के जरिए AI को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे इस सेक्टर में पूंजी लगातार आ रही है. न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर के देश AI इंफ्रा को सपोर्ट कर रहे हैं. 
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 AI निवेश अब ट्रेंड नहीं, आर्थिक बदलाव

NDTV AI Summit में एक महत्‍वपूर्ण बात निकल कर सामने आई कि AI सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि आर्थिक क्रांति है. जिन कंपनियों ने AI को अपनाया, उनकी वैल्यूएशन और कमाई कई गुना बढ़ी. यही वजह है कि निवेशक AI-फोकस्ड कंपनियों और टेक्नोलॉजी पर ध्‍यान लगा रहे हैं. हालांकि असली चुनौती हिस्‍सेदारी को लेकर है. 

मानव गर्ग ने कहा, 'वैश्विक AI बाजार में भारत की हिस्सेदारी कम है. पहले भी मल्टीनेशनल कंपनियां आकर रेवेन्‍यू लेकर जाती रही हैं, इसलिए नवाचार को उस फ्रंटियर लेयर से आगे होना चाहिए जहां Anthropic और OpenAI जैसी कंपनियां काम करती हैं. उन्होंने कहा कि EmergentAI ने प्रोडक्शन-रेडी मॉडल्स के जरिए यही किया है. इसके लिए गहरी तकनीकी समस्याएं सुलझाने वाली टीम और पर्याप्त पूंजी की जरूरत होती है.'

उन्होंने यह भी कहा कि पूंजी के मामले में दूसरे देशों को बढ़त हासिल है और केवल सरकार के भरोसे इतना निवेश संभव नहीं है. भारत को वैश्विक स्तर पर बेहतर तरीके से पेश करना होगा ताकि बाहर से निवेश आकर्षित हो सके, क्योंकि AI में यह एक वैश्विक दौड़ है.  

विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दशक में AI बाजार कई ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. ऐसे में यह निवेश का सिर्फ नया विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की सबसे बड़ी वेल्थ-क्रिएशन कहानी बनता दिख रहा है.

Source: NDTV Research, Profit Insight, PTI, PIB, Visual Capitalist, StartUs Insights, Investing.com, CompaniesMarketCap

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