एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में शामिल होने पहुंचे ब्रिटेन के एल्सट्री और बोरेहामवुड टाउन काउंसिल के मेयर तुषार कुमार ने अपनी इस यात्रा को लेकर खुलकर बात की. हरियाणा के रोहतक के रहने वाले 23 साल के तुषार ने इसी साल मई में यूनाइटेड किंगडम के इतिहास में सबसे कम उम्र के भारतीय मूल के मेयर बनने का रिकॉर्ड बनाया है. उन्होंने कहा कि पहला चुनाव हारने के बाद उन्होंने अपने अनुभव से सीखा और इस पूरी यात्रा के दौरान कई चुनौतियों का भी सामना किया.
तुषार कुमार ने कहा, "पहला चुनाव हारने के बाद मैं थोड़ा दुखी था, मुझे नहीं लग रहा था कि मैं जीत पाऊंगा. लेकिन मेरी मां ने मुझसे कहा कि तुम सिर्फ कर्म करो और फल की चिंता मत करो. बेसहारा लोगों की मदद करो. उन्हीं दिनों मैंने सड़क पर ऐसे लोगों को देखा, जिन्हें मदद की जरूरत थी और मैंने उन्हें खाने का सामान और पैसे दिए. मैं सच में कर्म में विश्वास रखता हूं. आप अगर अच्छा करेंगे तो उसका फल वापस आपको जरूर मिलेगा. मुझे लगता है कि इन्हीं वजहों से मुझे सफलता मिली और मैं चुनाव जीत सका."
उन्होंने कहा कि मैंने राजनीति में ईमानदारी से काम करने का प्रयास किया है. कभी हम सुनते थे कि नो डॉग, नो इंडियंस अलाउड. वहां से आज जहां हम हैं, वहां तक का सफर शानदार रहा है. तुषार ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि युनाइटेड किंगडम में प्रवासी लोगों को लेकर स्थानीय जनता में चिंता दिखती है. उन्हें लगता है कि उनकी नौकरियां सेफ रहें. उनकी हेल्थ सर्विसेज पर बहुत दबाव न पड़े. इसलिए कभी समस्याएं भी आती हैं, लेकिन फिर भी युनाइटेड किंगडम एक अच्छी सभ्यता है. हम तो भारत के वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को ही अमल में लाते हैं.

तुषार कुमार ने कहा कि मैं भले ही भारतीय मूल का हूं, लेकिन मेरा पद ऐसा है कि मुझे सबके लिए काम करना है. पहली बार जब खड़े हुए तो चुनाव हार गए थे. इसके बाद दोबारा लड़े तो जीत मिली और वह 23 साल की उम्र में ही मेयर बन गए थे. मैंने गरीबों की मदद की थी और जब जीत मिली तो शायद यही वजह थी, जिससे मुझे सफलता मिली.
बता दें कि तुषार कुमार की मां प्रवीण रानी भी हेर्ट्समेर बॉरो काउंसिल की पहली भारतीय मेयर बनी थीं. उनकी यह सफलता भारतीय मूल के उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने देश से सात समंदर दूर बसे हुए हैं.
तुषार ने दुनिया के सबसे मशहूर और टॉप कॉलेजों में से एक किंग्स कॉलेज लंदन (King's College London) से अपनी पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने यहां से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है. उन्होंने जिस विषय की पढ़ाई की, उसी को अपना करियर भी बनाया. राजनीति की बारीकियों को कॉलेज में समझने के बाद उन्होंने बेहद कम उम्र में ही जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दिया था. महज 20 साल की उम्र में तुषार पहली बार काउंसलर (पार्षद) चुन लिए गए थे. मेयर बनने से पहले तुषार यूके सरकार के 'डिपार्टमेंट फॉर वर्क एंड पेंशन्स' में पॉलिसी एडवाइजर के तौर पर भी काम कर चुके हैं. इसके बाद वे शहर के डिप्टी मेयर बने और अब मेयर की सबसे बड़ी कुर्सी पर हैं.
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