डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर चल रही बहस पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा का बड़ा बयान सामने आया है. NDTV वर्ल्ड समिट 2026 में उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक रुपये की किसी खास कीमत या लेवल को टारगेट नहीं करता है. RBI का काम सिर्फ इतना है कि करेंसी मार्केट में अचानक बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव न आए और सट्टेबाजी पर लगाम लगाया जा सके. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि RBI सट्टेबाजी और करेंसी में उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर बनाए हुए है.
उन्होंने कहा कि सट्टेबाजी या रुपये तेज गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई जरूरत पड़ने पर कदम उठाता है. ऐसे ही जब भी बाजार में कोई अनिश्चितता दिखेगी, आरबीआई जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा. रुपये को सपोर्ट देने के लिए जरूरत पड़ने पर ही हस्तक्षेप करेंगे.
हाल के दिनों में रुपया डॉलर के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर यानी करीब 97 रुपये के पास पहुंच गया था. हालांकि इसके बाद इसमें लगातार 8 दिनों तक रिकवरी देखा गया और यह चार महीने के ऊपरी स्तर को छूकर 94.83 रुपये के आसपास आ गया.
RBI गवर्नर ने बताया कि एक दशक पहले अक्टूबर 2016 में रुपया 66.83 पर था, लेकिन देश के मजबूत आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि घबराने की कोई बात नहीं है. भारत की हालिया 7.8% जीडीपी ग्रोथ दर अर्थव्यवस्था की अंदरूनी ताकत को दिखाती है.
महंगाई के मोर्चे पर गवर्नर ने माना कि कीमतों का दबाव थोड़ा ज्यादा है, लेकिन यह आरबीआई के तय दायरे के भीतर ही है. उन्होंने जानकारी दी कि पिछले 10 सालों में देश की औसत महंगाई दर 4.7% रही है, जो उससे पहले के चार सालों की 7.4% औसत दर के मुकाबले काफी कम और नियंत्रण में है.
विदेशी मुद्रा भंडार पर बात करते हुए संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत का एक्सटर्नल सेक्टर बहुत मजबूत और टिकाऊ है. FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम के तहत जुटाए गए पैसे को वापस चुकाने के लिए रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और समय मौजूद है. औसतन इन डिपॉजिट का समय 4 साल से ज्यादा का है, इसलिए भुगतान को लेकर किसी भी तरह की चिंता की बात नहीं है.
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