Sonia Gandhi Admitted to Hospital: देश की जानी-मानी राजनीतिक शख्सियत सोनिया गांधी के स्वास्थ्य को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई, जब उन्हें सांस संबंधी परेशानी के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया. राजधानी दिल्ली और एनसीआर में सर्दी के साथ-साथ बढ़ता वायु प्रदूषण बुज़ुर्गों और सांस की पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए खासा खतरनाक साबित हो रहा है. ऐसे में सोनिया गांधी का अस्पताल में भर्ती होना सिर्फ एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य मामला नहीं, बल्कि यह उस बड़े खतरे की ओर भी इशारा करता है, जिससे हर उम्र के लोग खासतौर पर अस्थमा के मरीज जूझ रहे हैं.
सर गंगा राम अस्पताल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सोनिया गांधी को कल रात करीब 10 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल प्रशासन ने साफ किया कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. जांच में सामने आया कि ठंडे मौसम और प्रदूषण के संयुक्त असर के कारण उनका ब्रोंकियल अस्थमा हल्का बढ़ गया था. एहतियात के तौर पर डॉक्टरों ने उन्हें निगरानी में रखने का फैसला लिया.
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डॉक्टरों ने क्या बताया?
अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अजय स्वरूप के अनुसार, फिलहाल सोनिया गांधी की हालत पूरी तरह स्थिर है. वह इलाज पर अच्छी प्रतिक्रिया दे रही हैं. उन्हें एंटीबायोटिक्स और अन्य सहायक दवाइयां दी जा रही हैं. डॉक्टरों की टीम उनकी क्लिनिकल प्रगति पर लगातार नजर रखे हुए है और संभावना है कि एक-दो दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी.
ब्रोंकियल अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें सांस की नलियां संवेदनशील हो जाती हैं. ठंडी हवा, धूल, धुआं और प्रदूषक कण इनके भीतर सूजन बढ़ा देते हैं, जिससे सांस फूलना, सीने में जकड़न और खांसी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. सर्दियों में हवा भारी हो जाती है और प्रदूषण लंबे समय तक वातावरण में ठहरा रहता है, जिससे अस्थमा के मरीजों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
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अस्थमा के लक्षणों में सांस लेने में दिक्कत, सीने में भारीपन, खांसी और सांस छोड़ते वक्त सीटी जैसी आवाज आना शामिल है. यह समस्या रात को सोते वक्त और ज्यादा परेशान कर सकती है. अगर हवा में प्रदूषण की मात्रा ज्यादा हो तो ये लक्षण और बढ़ सकते हैं और मरीजों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है.
रिसर्च बताती हैं कि, हवा में मौजूद कुछ खास धातु और रसायन अस्थमा को गंभीर बना सकते हैं. यह शोध हार्वर्ड टी. एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर जोएल श्वार्ट्ज और उनकी टीम ने किया. शोध में हवा में मौजूद निकेल, वैनेडियम और सल्फेट जैसे प्रदूषकों का विश्लेषण किया गया. नतीजे चौंकाने वाले रहे, बच्चों में इन प्रदूषकों की मात्रा थोड़ी भी बढ़ने पर अस्थमा के कारण अस्पताल में भर्ती होने के मामले करीब 10.6% तक बढ़ गए. 19 से 64 साल के वयस्कों में यह बढ़ोतरी लगभग 8% देखी गई.
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सोनिया गांधी का मामला हमें यह समझाता है कि प्रदूषण सिर्फ आंखों में जलन या खांसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गंभीर सांस की बीमारियों को बढ़ाकर अस्पताल तक पहुंचा सकता है. खासकर बुज़ुर्ग, बच्चे और पहले से अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों को सर्दियों में बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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Edited by: पीयूष जयजान© Copyright NDTV Convergence Limited 2026. All rights reserved.