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बाढ़ की वजह इंसानों की बनाई नीतियां?

एनडीटीवी इंडिया के मैनेजिंग एडिटर रवीश कुमार

जिन इलाकों में कुछ हफ्ते पहले तक सूखे का कहर था, वहां अब बाढ़ का कहर है. तब हम सूखे को जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में देख रहे थे. अब बाढ़ का भयंकर कहर है, अब हम बाढ़ को जलवायु परिवर्तन की नज़र से देख रहे हैं. ज़मीन पर बाढ़ के कारण इंसानों की बनाई नीतियां हैं जिसे मैन मेड क्राइसिस कहते हैं. प्राकृतिक संसाधनों का बेख़ौफ़ इस्तमाल जलवायु परिवर्तन के कारणों को बढ़ाता है. इस बाढ़ को दो तरह से समझिए. दो महीने की बारिश अगर दो हफ्ते में हो जाए तो क्या होगा. क्यों ऐसा हो रहा है. आप मानें या न मानें जो लोग ऊंचे बांधों, कार्बन उत्सर्जन, और नदियों के किनारे निर्माण कार्यों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं, जिन्हें हम एक्सपर्ट कहते हैं, बुलाते हैं और सुनकर भुला देते हैं, उनका मज़ाक उड़ाते हैं, लेकिन उनकी एक एक बात सही साबित होती जा रही है. कई दशक से उनके लेख सही साबित होते जा रहे हैं. इस तबाही में अरबों रुपये की संपत्ति और जानमाल की बर्बादी हुई है. हम भूलना चाहते हैं मगर नदियां और प्रकृति भूलने नहीं दे रही हैं.

आप टीवी पर हेलिकॉप्टर से बाढ़ का सर्वे करते मुख्यमंत्रियों को देखते होंगे. कभी सोचिए कि हेलिकॉप्टर में बैठकर वो क्या देखते होंगे. पानी का विस्तार डुबे हुए घर और पेड़ दिखाई देते होंगे लेकिन क्या उन्हें अपनी नीतियों और योजनाओं का ख़राब असर भी दिखता होगा, क्या वे सोचते होंगे कि नदी के किनारे की ज़मीन अगर बची होती, पेड़ अगर बचे होते तो शायद इतनी तबाही नहीं होती. मुझे नहीं लगता कि कोई मुख्यमंत्री आत्मचिन्तन कर रहा होगा. हेलिकॉप्टर दौरे का यह वीडियो किसी मुख्यमंत्री के संवेदनशील होने का नहीं है, बल्कि बाढ़ और तबाही के कारणों के प्रति लगातार उदासीन बने रहने का है. इसलिए हेलिकॉप्टर सर्वे के बाद मुख्यमंत्री क्या कह रहे हैं ध्यान से सुनें. उनके बयान में आंकड़े सुनाई देंगे, कितने मरे, कितने प्रभावित हैं, मुआवज़ा की राशि कितनी है और राहत व बचाव कार्यों के बारे में बात कर रहे होंगे लेकिन नदियों के साथ जो हो रहा है उस पर नहीं बोलेंगे.

हम इन तस्वीरों को देखते हुए इस वक्त नदी को सिर्फ अपराधी के रूप में देख रहे हैं. ख़ुद इंसान ने नदी के साथ क्या अपराध किया है. आप इन दिनों नदी के सौंदर्यकरण की योजना के बारे में सुनते होंगे. सरकारों को पता है कि नदी के किनारे कर्मकांड के लिए लोग आते हैं इसलिए घाट की सजावट पर काफी पैसा खर्च किया जाता है, ताकि लगे कि विकास हो रहा है. करोड़ों रुपये की योजना बन रही है. लेकिन चमक के नाम पर हो रही इस मूर्खता के पीछे कितना पैसा बर्बाद हो रहा है इसका हिसाब नहीं.

एक वीडियो में दिख रहा है कि नदी किनारे बना एक हाथी कटाव की वजह से बह रहा है. टीवी ने सिर्फ यही बताया होगा कि बाढ़ के पानी में कैसे सीमेंट का बना विशालकाय हाथी ढह रहा है और जिराफ गिर कर बह रहा है. आंध्र प्रदेश में एक जगह है श्रीकाकुलम. यह वीडियो सिर्फ बाढ़ की धारा में सीमेंट के बने हाथी और जिराफ के बह जाने का नहीं है. यहां की बंशधारा नदी में बाढ़ आई है. इसके कारण कलिंगापट्टनम बीच पर 30 फीट आगे तक पानी आ गया और यह सब कुछ बह गया. दो हाथी, दो जिराफ और बुद्ध की एक प्रतिमा पानी में बह गए. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार बीच ही बह गया है. पर्यटन विभाग ने इसे बनाया था पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए. अब आप इसे बहते हुए देखते हैं लेकन यह नहीं देखते हैं कि हमारी नीतियां और योजनाएं किस हद तक अस्थायी साबित होती जा रही हैं. तो यह पैसा बर्बाद हो गया लेकिन लिख कर रखिए यहां और कहीं और भी पर्यटन भी दोबारा यही करेंगे. सीमेंट की मूर्ति बनाएंगे.

केरल में पिछले साल जून और जुलाई में अच्छी बारिश हुई थी. जब अगस्त के महीने में काफी तेज़ बारिश हुई जिसके कारण वहां वक्त भयंकर बाढ़ आई थी. लेकिन इस साल जून और जुलाई में बारिश कम हुई. और अगस्त में दो महीने के बराबर की बारिश हो गई. इस बार की ज़्यादातर तबाही इसी का परिणाम है. केरल में 2018 में 400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सौ से अधिक लोगों का आज तक पता नहीं चला. 25 हज़ार करोड़ से अधिक की बर्बादी हो गई थी. इस साल भी केरल का हाल अच्छा नहीं है. 14 ज़िलों में स्कूल कालेज बंद कर दिए गए हैं. 9 ज़िलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है. 23000 लोगों को बचाकर निकाला गया है. केरल में 27 लोगों की मौत हुई है. राज्य भर में भू-स्खलन की 20 घटनाएं रिकार्ड हुई हैं.

कोच्‍ची एयरपोर्ट बाढ़ के कारण बंद कर दिया गया है. पिछले साल की बाढ़ में भी इसे बंद किया गया था. 2018 की बाढ़ में 250 करोड़ का नुकसान हुआ था. सोचिए इतनी राशि की योजना बनाते समय हम परवाह तक नहीं करते कि नदी की ज़मीन पर बनाएंगे तो एक दिन नदी आएगी. एयरपोर्ट के पास से ही पेरियार नदी बहती है. एक नहर भी इस नदी से निकलती हुई पास से गुज़रती है जिसमें पानी का स्तर बढ़ गया है. नदी के किनारे धान के खेतों को बराबर कर एयरपोर्ट बनाया गया. लिहाज़ा बाढ़ के पानी को सोखने की जगह नहीं बचती है और न ही गुज़रने का रास्ता बचा होता है. काफी साल से पेरियान नदी में बाढ़ नहीं आई थी, हमने सोचा कि कभी नहीं आएगी. अब जब पानी का लेवल बढ़ा है तो एयरपोर्ट को बंद करना पड़ता है. केरल के वायनाड में भू स्खलन की कई घटना हुआ है. भारी वर्षा के कारण घर डूब गए हैं और कारें बह गईं हैं. हर जगह पानी जमा हो गया है. पानी के प्राकृतिक बहाव की जगह नहीं बची है. इसलिए आपको यह तबाही भयंकर नज़र आ रही है. अगर इसी तरह और ज़ोरदार बारिश हुई तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है. कैमरामैन एस पी बाबू और स्नेहा केरल से लगातार रिपोर्ट कर रहे हैं.

कर्नाटक में भी 18 ज़िलों में स्कूल कॉलेज 15 अगस्त तक बंद कर दिए गए हैं. 18 ज़िलों में बाढ़ है. यहां की सभी नदियां विकराल हो चुकी हैं. 26 लोगों की मौत हुई है और 1 लाख से अधिक विस्थापित हो गई है. सबसे ज़्यादा तबाही बेलगाम में है क्योंकि महाराष्ट्र की बाढ़ का पानी वहां पहुंच रहा है. दक्षिण कर्नाटक यानी मंगलौर की तरफ भी बाढ़ बेकाबू हो चुका है. कर्नाटक के तटीय इलाकों में भारी बारिश की आशंका है. मैसूर में एक दिन में जितनी बारिश होनी चाहिए उससे 32 गुना अधिक बारिश हुई है. 317 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है. धारवाड़ में सामान्य वर्षा से 22 गुना बारिश हुई है. कोडागू में 1083 मिलीमीटर बारिश हुई है, एक दिन में होने वाली सामान्य बारिश से 700 प्रतिशत ज़्यादा है. सोचिए अचानक इतना पानी बरस जाए तो क्या होगा.

शिमोगा ज़िले के में काफी बारिश हो रही है. जोग जलप्रपात का यह विकराल रूप बता रहा है कि कर्नाटक के क्या हालात हैं. ग्रामीण लोग कह रहे हैं कि उन्होंने 60-70 साल के जीवन में ऐसी बारिश नहीं देखी है. लगता है कि बादल फट गए हैं. बेलगाम शहर का संपर्क टूट गया है. धारवाड़, शिमोगा, चिकमंगलूर, हासन बाढ़ के पानी में डूबे हैं. आप जानते हैं कि कर्नाटक का पश्चिमी घाट 650 किमी लंबा है. यहां के 14 में से 12 घाट का आंतरिक इलाके से संपर्क प्रभावित हुआ है. गोवा बेलमाग, कारवाड़ हुबली, मंगलूर-बंगलौर, उड़पी-शिमोगा का संपर्क टूट गया है. यह वीडियो पटडक्कल का यह मंदिर परिसर 12 साल पुराना है. यहां जैन और हिन्दू मंदिरों का शानदार परिसर है. इस जगह पर बाढ़ का कोई रिकॉर्ड नहीं है जब से रिकॉर्ड मिलता है. यही नहीं अगर बारिश इसी तरह होती रही तो हम्पी भी डूब सकता है. ट्रेन संपर्क भी कई जगहों पर टूट गया है. 100 लोगों के लापता होने की खबर है. कृष्णा सबसे बड़ी नदी है, इसकी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. इसके अलावा वरदा, नेत्रावती, कावेरी, हेमावती, शरावती, काली, वाराही मार्कंडेय, भीमा, मल्लप्रभा, घाटप्रभा, भ्रदावती, कुमारधरा, वरडा नदी अपने ख़तरे के निशान से ऊपर हैं. हुबली में इनती बारिश हो रही है कि बड़ी झील का तो पानी नए अदालत परिसर में ही घुस आया. यहां पर कर्नाटक हाईकोर्ट का बेंच है. पानी के कारण एक दिन की छुट्टी करनी पड़ी. यहां पर डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि में फसल बर्बाद हो गई है. 

जून के महीने में मानसून काफी कमज़ोर था. हम सूखे की बात कर रहे थे. बिहार में नीतीश कुमार सूखे की आशंका ज़ाहिर कर रहे थे. असम और बिहार की बाढ़ में ही 200 से अधिक लोगों के मरने की खबर आई. सोचिए 24 जून को हिन्दू अखबार लिखता है कि कर्नाटक में बारिश 30 प्रतिशत कम हुई है. इतनी कमी मात्र कुछ दिनों के भीतर पूरी हुई है. अंदाज़ा लगा सकते हैं कि क्या हो रहा है. महाराष्ट्र का भी वही हाल है. जिन इलाकों में सूखा था वहां बाढ़ है. जब मुंबई में बाढ़ की खबर आ रही थी तब वर्धा से सूखे की खबर आ रही थी. सांगली और कोल्हापुर में बाढ़ आ गई है. तीस साल बाद ऐसी बाढ़ आई है. 1989 में बाढ़ आई थी.

आप बाढ़ की तस्वीरें देख रहे हैं लेकिन इन्ही जगहों पर मई और जून के महीने में सूखे की रिपोर्टिंग हो रही थी. नासिक में बाढ़ है लेकिन मई में नासिक के 22 लाख लोग जल संकट से प्रभावित बताए जा रहे थे. 20 मई में टाइम्स आफ इंडिया की रिपोर्ट है कि सांगली में सूखा है. सरकार यहां मवेशियों के चारे के लिए कैंप बनाने के आदेश दे रही थी. अब यहां बाढ़ की तबाही से निपटा जा रहा है. मई और जून में महाराष्ट्र के अखबारों में खबर आ रही थी कि गांव में सूखे के कारण पुणे में पढ़ने वाले बच्चे गांव नहीं जा रहे थे. 14 मई 2019 की हिन्दू की न्यूज़ है कि पुणे के डैम में पानी का लेवल जा रहा है और सूखे का अंदेशा है. पुणे के चार डैम में पानी खतरनाक तरीके से नीचे चला गया था. दो महीने बाद इन जगहों पर बाढ़ के हालात हैं. सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की टीम बचाव के काम में लगी है. कोल्हापुर के कई इलाकों में पानी 30 फुट से भी अधिक ऊपर आ गया है. पेड़ तक डूब गए हैं. कई जगहों पर मवेशियों को छत पर रखा गया है. पंचगंगा, कृष्णा और कोयना नदी का पानी सड़क पर आ गया है. महाराष्ट्र में 25 लोगों की मौत हुई है और ढाई लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित जगहों पर बचाया गया है. कोल्हापुर और सांगली में 329 गांव पानी में डूबे हैं. यहां पर नेवी की 26 टीम, एनडीआरएफ की 22 टीम और इंडियन कोस्ट गार्ड की 6 और भारतीय सेना की 11 टीम है. राज्य आपदा प्रबंधन की भी तीन टीमें यहां हैं. आप सोच सकते हैं कि तबाही का क्या आलम होगा. सोहित मिश्र वहां से लगातार रिपोर्ट कर रहे हैं.

गोवा के गांवों में भी बाढ़ है. बारिश ने तबाही मचाई है. फिलहाल वहां बारिश थमी है और हालात कुछ सुधरे हैं. असम, बिहार और गुजरात में भी भारी बारिश की आशंका है. मध्य प्रदेश के धार और बड़वाणी में नर्मदा नदी ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही है. नर्मदा की सहायक नदियों में बाढ़ की स्थिति है. हम नर्मदा बचाओ आंदोलन की खबर सुनते हैं और फिर नज़र फेर लेते हैं कि ये तो चलता ही रहता है. दरअसल हम बाढ़ और उसके कारणों से उदासीन होने का अभ्यास करते रहते हैं. 39 साल से मेधा पाटकर क्यों नर्मदा के लिए आंदोलन कर रही है, हम ध्यान तक नहीं देते हैं. उल्टा मज़ाक उड़ाने लगते हैं मगर कभी यह हमारी चिन्ताओं में शामिल नहीं होता कि उनके सवालों का समाधान क्यों नहीं होता है.

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Kerala has been hit by the worst floods in a 100 years. The Kerala Government estimates Rs 21,000 crore will be needed to rebuild the state. The funds are required to rebuild hundreds of flooded villages, thousands of damaged and destroyed homes and 10,000 kilometres of ravaged roads.
 
This Onam as Kerala struggles to rebuild after the most devastating floods in a century, NDTV has organised a special telethon to raise funds for Kerala. We have specific goals - to enable the rebuilding of villages in the worst-affected districts and provide immediate assistance in terms of rehabilitation and food kits to people in the worst affected areas . All donations will go directly to our partner NGO Plan India.
 
Our focus will be coverage that makes a difference, stories with a heart, standing by people and making their experience a shared one to effect change.   
 
NDTV chose to report on this massive crisis with unwavering focus and commitment; having done that, now we look, as NDTV always does, to go beyond the news and make a difference to people's lives.

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    Unlike what usually happens during a disaster, the Kerala government has not faced severe criticism for what went wrong on the ground. Popular perception has been that the political class, bureaucracy, civil society and of course the people of Kerala worked well together to overcome the adversity.