अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस अब भारत में सेना के लिए हेलीकॉप्टर भी बनाएगी. मंगलवार को अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इटली की दिग्गज सिविल डिफेंस कंपनी लियोनार्डो के साथ एक डील की. इस डील के अनुसार दोनों कंपनियां मिलकर भारत में सेना के लिए हेलीकॉप्टर का निर्माण करेंगे. भारत के लिए यह डील गेमचेंजर साबित होगी. NDTV ने इस डील को लेकर अदाणी डिफेंस के CEO आशीष राजवंशी से बात की. जिसमें उन्होंने कहा- हमारे प्रधानमंत्री ने जो 2047 के विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है, उसका मोस्ट इंर्पोटेंट पिलर ये है कि हम क्रिटिकल टेक्नोलॉजी को भारत में लेकर आए, जॉब क्रिएशन करें. ताकि आत्मनिर्भरता हासिल किया जा सके. उसी दिशा में यह डील हुई है. इस लिहाज से ये हमारे देश के लिए काफी मायने रखता है.
मालूम हो कि भारत और यूरोपियन यूनियन ने 27 जनवरी, 2026 को एक ऐतिहासिक सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए जॉइंट डिफेंस प्रोडक्शन और जॉइंट डेवलपमेंट को एक प्रमुख स्तंभ के रूप में शामिल किया गया है. इस समझौते का उद्देश्य भारत की "मेक इन इंडिया" पहल को बढ़ावा देना है, साथ ही यूरोपियन यूनियन की रक्षा कंपनियों को भारत के बढ़ते बाजार और कुशल वर्कफोर्स तक पहुंच प्रदान करना है. इसलिए भारत और इटली की कंपनी के बीच हुई इस डील को बहुत अहम माना जा रहा है.
अदाणी डिफेंस और इटली की कंपनी लियोनार्डो के बीच हुई डील पर आशीष राजवंशी ने कहा, बीते 30 साल से इंडिया सिविल में और डिफेंस में इस डील इंतजार कर रहा था. आज देश में केवल HAL ही हेलीकॉप्टर बनाती है. उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है. लेकिन आज हमें और भी उन्नत तकनीक और कैपेबिलिटी की जरूरत है. इसमें बहुत सारे लोग कंट्रीब्यूट कर सकते हैं. जैसे की रक्षा सचिव ने बोला कि अगले 10 से 15 साल में हमें हजार के करीब हेलीकॉप्टर की जरूरत है. ऐसे में चार या पांच प्लेयर मिलकर इंडिया की जरूरत को पूरा करेंगे.
सीईओ ने बताया कि इससे भारत में हेलीकॉप्टर तकनीक का बेस बनेगा, हेलीकॉप्टर का उत्पादन होगा. आपको लॉन्ग टर्म सस्टेनेबिलिटी मिलेगी. हमारी ट्रेनिंग भी होगी. इस तरह की डील से भारत में एक पूरा इकोसिस्टम डेवलप होगा. पूरा सप्लाई चैन विकसित होगा और विकसित भारत का सपना पूरा होगा.
सवाल - जो हेलीकॉप्टर बनेंगे, उसका फोकस फिलहाल मिलिट्री पर होगा या सिविल हेलीकॉप्टर भी बनेंगे?
जवाब - शुरुआत मिलिट्री हेलीकॉप्टर से होगी, क्योंकि मिलिट्री की जरूरत काफी बड़ी है. यही हेलीकॉप्टर सिविल में भी यूज हो सकता है. आज आपने देखा कि वर्ल्ड में हमारा पेनेट्रेशन काफी कम है. जब हम अर्बन कनेक्टिविटी की बात करते हैं, तो वहां भी यह हेलीकॉप्टर आराम से यूज हो सकता है.
सवाल - फिलहाल हेलीकॉप्टर की जरूरत बहुत ज्यादा है और, HAL उस जरूरत को पूरा नहीं कर पा रहा है?
जवाब - देखिए पिछले 75 साल में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने जो किया है वह वाकई में शानदार है. कॉम्पोनेन्ट और सब सिस्टम रेडी है. आज उनका इकोसिस्टम बहुत अच्छा बना है. आज उसी सिस्टम की बदौलत हम अपनी क्षमता को बढ़ा सकते हैं. इससे हेलीकॉप्टर की जरूरत के गैप को पूरा किया जा सके.
सवाल - फिलहाल जो लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की बात हो रही है क्या उसमें भी आप (अदाणी ग्रुप) हिस्सा लेंगे?
जवाब - हमारा फोकस फिलहाल उसी पर है. आज लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर और रिकॉनेस और सर्विलांस में 200 हेलीकॉप्टर का आरएफ़आई (Request For Information) आर्मी ने इशू किया है. नौसेना ने भी 88 हेलीकॉप्टर का RFI ईशु किया है. हम दोनों में हिस्सा लेंगे और इस जरूरत को पूरा करेंगे.
डिलीवरी की टाइमलाइन पर क्या बोले सीईओ
आशीष राजवंशी से पूछा गया कि भारत में डिलीवरी की टाइमलाइन काफी अहम है. अगर इसमें देरी होती है, तो इसका सीधा असर सेनाओं की क्षमता पर पड़ता है. ऐसे में सवाल ये है कि पहला हेलीकॉप्टर देश में बनकर कब तक तैयार हो जाएगा? और क्या इसे बाहर भी एक्सपोर्ट करने का प्लान है?
इसके जवाब में CEO आशीष राजवंशी कहते हैं कि उनकी पहली प्राथमिकता हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग का इकोसिस्टम विकसित करना है. वो कहते हैं कि इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स में समय लगता है. आने वाले 4-5 सालों में इसका पूरा इकोसिस्टम तैयार हो जाएगा, जो हेलीकॉप्टर बना रहा होगा. फिर चाहे बात चाहे लाइट हो या फिर मीडियम, हर तरह का हेलीकॉप्टर तैयार हो रहा होगा. सीईओ आशीष कहते हैं कि इसकी सबसे अच्छी बात है कि ये हेलीकॉप्टर्स मेक इन इंडिया होंगे.
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