देश की राजधानी दिल्ली में जारी AI समिट में दुनिया भर की निगाहें भारत की मेजबानी और टेक्नोलॉजी नेतृत्व पर टिकी हैं. समिट में 20 देशों के प्रमुख और 45 मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं, जो AI के नियम, सुरक्षा और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दों पर खास चर्चाएं कर रहे हैं. इसी दौरान ब्रिटेन के AI और ऑनलाइन सेफ्टी मंत्री कनिष्क नारायण ने NDTV से खास बातचीत में भारत–ब्रिटेन पार्टनरशिप, इनोवेशन और AI नियमों पर खुलकर बात की.
ब्रिटिश काउंसिल, नई दिल्ली में NDTV से बातचीत में कनिष्क नारायण ने कहा कि AI को लेकर ब्रिटेन और भारत की साझेदारी लंबे समय से मजबूत रही है. उन्होंने कहा कि जैसा आपने कहा, ब्लेचली पार्क से AI यात्रा की शुरुआत हुई थी. आज नई दिल्ली में AI Impact Summit इस सफर का बेहद अहम पल है. उन्होंने याद दिलाया कि एलन ट्यूरिंग से लेकर डीपमाइंड तक, ब्रिटेन AI रिसर्च और इनोवेशन का बड़ा सेंटर रहा है. लेकिन उनका सबसे बड़ा जोर भारत–ब्रिटेन की साझा सोच पर रहा—AI के जरिए समृद्धि और इंसानी गरिमा बढ़ाने के लक्ष्य पर.
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जब भारत की AI क्षमताओं पर सवाल पूछा गया तो UK मंत्री ने कहा कि भारत अब महज उभरता हुआ ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे मजबूत टेक-टैलेंट हब में बदल चुका है. उन्होंने कहा कि मैं नहीं मानता कि भारत धीरे-धीरे विकसित हो रहा है. भारत पूरी तरह से विकसित इनोवेशन इकोसिस्टम है. यह दुनिया का टेक टैलेंट का धड़कता हुआ सेंटर है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत न सिर्फ सर्विस सेक्टर बल्कि AI मॉडल डेवलपमेंट में भी फ्रंटलाइनर की भूमिका निभा रहा है.
खासकर ऐसे स्मॉल लैंग्वेज मॉडल तैयार करने में जो अरबों लोगों के मोबाइल और डिवाइस तक पहुंच सकें. मंत्री के अनुसार, AI को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में वास्तविक बदलाव का माध्यम बनाना भारत और ब्रिटेन दोनों का साझा मिशन है.
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AI सुरक्षा और नियमन को लेकर यूके मंत्री ने कहा कि दुनिया में यह बड़ी बहस है और EU हो या फिर अमेरिका. उन्होंने कहा कि सरकारों को किसी भी नियम से पहले टेक्नोलॉजी को सही तरीके से समझना पड़ेगा. यूके में हमारे पास AI सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट है, जो दुनिया के बेहतरीन सेंटर में से है. जो कि फ्रंटियर लैब्स के साथ काम करता है ताकि सरकार को सही सलाह दी जा सके. समझ सबसे पहला कदम है, नियम बाद में आते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि ऑनलाइन सुरक्षा, खासकर महिलाओं, बच्चियों और बच्चों की सुरक्षा पर ब्रिटेन बेहद सख्त है और इसमें भारत को प्राकृतिक साझेदार बताया.
केश नारण ने बताया कि साल की शुरुआत में जब ‘Grok' प्लेटफॉर्म पर महिलाओं और बच्चों की तस्वीरों को गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाने लगा, तो भारत और ब्रिटेन दोनों ने सख्त रुख अपनाया. उनके शब्दों में भारत ने भी Grok के खिलाफ आवाज उठाई.
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