पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकंद नरवणे की किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टनी' को लेकर जबरदस्त विवाद छिड़ा हुआ हैं. प्रकाशक 'पेंगुइन' और पूर्व सेना प्रमुख के मुताबिक अभी तक यह किताब प्रकाशित नही हुई है. इसके बावजूद यह किताब संसद भवन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हाथों में देखी गई है. किताब के आधार पर एक मैगजीन ने रिपोर्ट भी छापी है. ताजा जानकारी के मुताबिक जनरल नरवणे की किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' फिलहाल रक्षा मंत्रालय के पास क्लीयरेंस के लिए लंबित है. इस विवाद के बाद अब रक्षा मंत्रालय किताब लिखने और उसकी परमिशन के लिए नए नियम बनाने में जुट गया है.
इस बीच खबर आई है कि सेनाओं से जुड़ी किताबों को लेकर रक्षा मंत्रालय एक नए नियम पर काम कर रहा है. इस नए नियम के तहत सेवा दे रहे और रिटायर्ड, दोनों तरह के सैनिकों को किताब लिखने से पहले रक्षा मंत्रालय की अनुमति लेनी होगी. यह नियम सेना से रिटायर हुए उन सैनिकों के लिए खासतौर से बनाया जा रहा है जो सेना छोड़ने के बाद अमूनन अपने अनुभव के आधार पर किताब लिखते है.
इसमें साफ तौर पर जिक्र होगा कि आप अगर भविष्य में सेना पर आधारित कोई किताब लिखना या छापना चाहते है तो उससे पहले क्या प्रक्रिया अपनानी होगी? किससे अमुमति लेनी होगी? नए नियम में यह भी जिक्र होगा कि अगर आप ऐसा नहीं करते है तो आपके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है. हालांकि, रक्षा मंत्रालय या सेना इस पूरे मामले पर ऑन रिकार्ड कुछ भी बोलने को तैयार है पर एनडीटीवी को जानकारी मिली है कि नए नियम बहुत जल्द लागू हो सकते हैं.
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सूत्रों के मुताबिक ऐसे मामलों को लेकर रक्षा मंत्रालय में गंभीर चर्चा चल रही है. नए नियमों को तैयार करने के लिए विस्तार से चर्चा की जा रही है. इन नियमों में मौजूदा सेवा नियमों और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) के प्रावधान भी शामिल किए जाने पर बात हुई है. वैसे अभी तक रिटायर्ड सेना अधिकारियों के लिए किताब लिखने पर कोई एक खास कानून नहीं है.अब तक उन पर अलग-अलग कानून और नियम लागू होते आए हैं. ये इस बात पर निर्भर करता है कि कैसी किताब लिखी गई है और उसमें कंटेंट कैसा है.
लेकिन एक बात साफ है राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी की सुरक्षा सबसे अहम है. सूत्रों के मुताबिक रिटायर्ड अधिकारियों को किताब लिखने से सीधे तौर पर नहीं रोका गया है. लेकिन आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम रिटायरमेंट के बाद भी लागू रहता है. मतलब कि अगर कोई फौजी रिटायरमेंट के बाद गोपनीय या संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक करता है, तो उसे अपराध माना जाएगा. सेना के सूत्रों के अनुसार हर सरकारी कर्मचारी जिसमें सेना के लोग भी शामिल हैं, उन सब पर ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट लागू होता है. सेना से रिटायर होने के बाद इसका पालन करना जरूरी होता है. वैसे भी आप जब किसी पद पर होते है तो आपके पास कई जानकारियां रहती हैं. लेकिन बाद में अगर आप इस बारे में कुछ लिखते है जो सीधे आपके सर्विस से जुड़ा हो,तो इसके आपको जरूरी क्लीयरेंस लेनी होती है.
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अगर किसी किताब में सैन्य अभियान, संवेदनशील जानकारी या गोपनीय बातें हों, तो उसे पहले रक्षा मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजना होता है. मंत्रालय संबंधित विभाग से जांच कराकर ही उसे छपने की अनुमति देता है.सेवा में मौजूद सैनिकों के लिए नियम और भी सख्त हैं. उन्हें किसी भी किताब, लेख या अन्य गतिविधि के लिए पहले लिखित अनुमति लेनी होती है. ये अनुमति कमांड से होकर सेना मुख्यालय या रक्षा मंत्रालय तक जाती है. आपको बता दें कि कोई भी गोपनीय जानकारी, सैन्य ऑपरेशन, हथियारों की क्षमता, खुफिया जानकारी या ऐसी कोई भी बात जो राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेश संबंधों को प्रभावित करे, उसे प्रकाशित करना सख्त मना है. यहां तक कि काल्पनिक कहानियां भी रोकी जा सकती हैं, अगर उनमें असली सैन्य जानकारी या ऑपरेशन जैसी बातें हों.
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