आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार डीपफेक सोशल मीडिया पर कितना बड़ा खतरा बन चुका है, इसका ताजा उदाहरण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के रूप में सामने आया है. हूबहू राजनाथ सिंह की तरह दिखने वाले एक फर्जी वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने का प्रयास किया गया, जिसमें लोगों को 22 हजार रुपये लगाने पर एक महीने में ही एक करोड़ देने का लालच देकर निवेश के लिए फंसाया जा रहा था.
एक मिनट 46 सेकंड का ये साइबर ठगी का वीडियो राजनाथ सिंह से बिल्कुल मिलती-जुलती तस्वीर और आवाज का इस्तेमाल करके डीपफेक के जरिए तैयार किया गया है. इसमें 22 हजार निवेश करने पर एक करोड़ रुपये तक के गारंटीड मुनाफे का लालच दिया जा रहा है. बताया जा रहा है कि अगर मुनाफा नहीं हुआ तो 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.
फेसबुक पर वायरल कराए जा रहे इस वीडियो में ये भी दावा किया जा रहा है भारत सरकार से अप्रूव्ड इस स्कीम को राजनाथ सिंह की देखरेख में आम लोगों की मदद के लिए शुरू किया गया है, इसलिए इसमें कोई खतरा नहीं है. इसमें बताया जा रहा है अगर कोई आज ही 22 हजार रुपये का निवेश करेगा तो आज की आज ही उसकी रकम बढ़कर 80 हजार रुपये हो जाएगी और एक महीने के अंदर ही रकम 15 लाख रुपये हो जाएगी. अगर छह महीने पहले निवेश किया होता तो रकम बढ़कर अब एक करोड़ हो चुकी होती.
Athenian Tech की रिपोर्ट में टेक्निकल जांच से पता चला है कि इस वीडियो को रेंडम नाम वाले लेंडिंग पेज https://v4rbecjinkwedraf.com/ से फैलाया जा रहा है. इस स्कैम वेबसाइट की असली पहचान छिपाने और हटाने से बचाने के लिए क्लाउडफेयर की मदद से तैयार किया गया है. फेसबुक पर इस वीडियो को WorldSnap नाम के पेज से पोस्ट किया गया है. उसे 'कंसलटेंसी एजेंसी' बताया गया है और उसके 1100 फॉलोअर्स भी दिखाए गए हैं. वैसे इस नाम के कई और भी जेनुइन फेसबुक पेज हैं. हालांकि अब ये वीडियो फेसबुक से हटाया जा चुका है. WorldSnap (आईडी 61578554740746) पर अब कोई वीडियो नहीं दिख रहा है. ये साफ नहीं है कि क्या इस डीपफेक वीडियो को फेसबुक ने हटाया है या फिर पोस्ट करने वाले ने खुद ही हटा लिया है.
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इस तरह के फेक स्कैम वीडियो के जरिए भोले-भाले निवेशकों को फुसलाकर लूटने का ये कोई नया ट्रेंड नहीं है. तमाम नामी गिरामी लोगों के इसी तरह के डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होते रहते हैं. पीएम मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, इन्फोसिस फाउंडर नारायणमूर्ति तक के इसी तरह के फर्जी निवेश स्कीम बताने वाले वीडियो पहले भी वायरल हो चुके हैं. इन फर्जी वीडियो को तैयार करने वाले इतने शातिर हैं कि हालिया घटनाओं को आधार बनाकर लोगों को गुमराह करने का पूरा प्रयास करते हैं.
भारत में डीपफेक और एआई का इस्तेमाल करके स्कैम, घोटाले और फर्जीवाड़े का गोरखधंधा कितना बढ़ चुका है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हर साल लाखों लोग इनके शिकार बन जाते हैं. आम भोले भाले लोगों को छोड़िए, अच्छे खासे पढ़े लिखे लोग भी इनके चंगुल में फंस जाते हैं और अपनी जिंदगी भर की जमापूंजी लुटा बैठते हैं. पीआईबी की पिछले साल अक्तूबर की रिपोर्ट बताती है कि साइबर सिक्योरिटी संबंधी घटनाएं 2022 में 10.29 लाख थीं, जो 2024 में दोगुने से ज्यादा होकर 22.68 लाख तक पहुंच गईं.
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के हवाले से पिछले साल सरकार ने संसद में बताया था कि साल 2024 में साइबर क्रिमिनल्स के चंगुल में फंसकर लोगों ने 22, 845 करोड़ रुपये गंवा दिए थे. यह 2023 के 7,465 करोड़ से 206 पर्सेंट ज्यादा था. 2023 में जहां 15.35 लाख शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 22.68 लाख तक पहुंच गई थी. सरकार साइबर फ्रॉड पर नकेल कसने के लिए तमाम उपाय कर रही है, लेकिन साफ है कि साइबर अपराधियों के हौसले दिनोंदिन बुलंद होते जा रहे हैं.
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