पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को कोलकाता में आयोजित "मैरीटाइम कॉन्क्लेव सागर संकल्प" में शामिल हुए. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि आज समुद्री क्षेत्र पहले की तुलना में, काफी बदल चुका है. आज के समय में समुद्री क्षेत्र सिर्फ़ व्यापार के रास्ते या नौसैनिक ताकत तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, तकनीकी इनोवेशन और रणनीतिक स्वायत्तता का अहम आधार बन चुका है.
रक्षा मंत्री ने कहा, "यदि हम State of Hormuz या पूरे Persian Gulf क्षेत्र को देखें, तो यह विश्व की एनर्जी सिक्योरिटी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है. जब इस क्षेत्र में डिस्टरबेंस या डिस्ट्रप्शन होता है, तो इसका सीधा असर ऑयल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है."
राजनाथ सिंह ने कहा, "आज हम सप्लाई चैन डिस्ट्रप्शन सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी देख रहे हैं. इन अनिश्चित्ताओं का सीधा प्रभाव अर्थव्यवस्था और ग्लोबल ट्रेड पर पड़ता है."
उनका बयान ऐसे समय पर आया है जब मध्य पूर्व में युद्ध गहराने के साथ ही कच्चा तेल तेज़ी से महंगा होता जा रहा है और अंतराष्ट्रीय व्यापार में अस्थिरता भी बढ़ती जा रही है. अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल बाज़ार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 88 डॉलर के करीब पहुंच गई है.
शुक्रवार को ट्रेडिंग के दौरान Brent Oil Futures की कीमत 87.96 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गयी. युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चा तेल 18 डॉलर प्रति बैरल से ज़्यादा महंगा हो चुका है.
भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 85% कच्चा तेल दुनिया के अलग-अलग देशों से आयात करता है, जिसमें मध्य पूर्व एशिया का हिस्सा सालाना लगभग 40%-45% है. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत का तेल आयात बिल पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
रक्षा मंत्री का बयान अमेरिकी उप विदेश मंत्री के भारत दौरे के दौरान आया है. दिल्ली यात्रा पर आये अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लेन्डौ ने रायसीना डायलॉग में गुरुवार को एक अहम बयान दिया था.
जब उनसे एक संवाद के दौरान पूछा गया कि मध्य एशिया में युद्ध कब तक ख़त्म हो सकता है, क्रिस्टोफर लेन्डौ ने कहा, "हमारे लिए मध्य-पूर्व एशिया में युद्ध का एंडगेम एक ऐसा मध्य पूर्व है जो दुनिया के अन्य हिस्सों के लिए खतरा नहीं है. हमने ईरान को अपनी रेड लाइन के बारे में समझाने की बहुत कोशिश की कि उसे परमाणु हथियार का विकास रोकना होगा. क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर ईरान परमाणु उपकरण से दुनिया को ब्लैकमेल करने में सक्षम होता, तो दुनिया के लिए कितना ख़तरा होता? हमने ईरान से बातचीत के ज़रिये समझाने की बहुत कोशिश की. लेकिन हमने निष्कर्ष निकाला कि यह कोशिश काम नहीं करेगी."
अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने कहा कि युद्ध की दिशा क्या होगी, इसको देखना होगा, लेकिन आख़िरकार ईरानी लोगों को यह तय करना होगा कि उनका नेतृत्व कौन करेगा. ज़ाहिर है, मध्य-पूर्व एशिया में युद्ध लम्बा चलने वाला है, और इसको लेकर भारत की चिंता बढ़ती जा रही है.
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