NDTV India.AI Summit में यूसी बर्कले में कंप्यूटर साइंस के प्रतिष्ठित प्रोफेसर स्टुअर्ट रसेल ने एआई और इंसानों के भविष्य को लेकर चौंकाने वाली बात कही. उन्होंने कहा कि दुनिया के पास अभी इस बात का जवाब नहीं है कि अगर मशीनें ज्यादा सक्षम हो गईं, खुद सोचने में सक्षम हो गईं, तो इंसानों का क्या होगा. लेकिन प्रतिष्ठित एआई कंपनियों के सीईओ भी मानते हैं कि इससे इंसानियत को खतरा है.
इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सेफ एंड एथिकल एआई के प्रेसिडेंट रसेल ने एआई से इंसानों को खतरे पर आगे कहा कि एआई कंपनियों के कुछ सीईओ या कहें कि लगभग सभी प्रमुख सीईओ इस बात को स्वीकार करते हैं कि इससे इंसानियत को बहुत बड़ा खतरा है. निजी बातचीत में वो कहते हैं कि काश मैं इसे रोक पाता. एक सीईओ जिसने खुलकर यह बात कही है, वो हैं एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोदेई.
प्रोफेसर रसेल ने प्रमुख एआई कंपनियों का मकसद ऐसे मशीनें बनाना है जो इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान हों. लेकिन जब आप आम लोगों से इस बारे में पूछते हैं कि वो कहते हैं कि यह वास्तव में बेहद मूर्खतापूर्ण होगा. कारण साफ है, बुद्धिमत्ता हमें दुनिया पर राज करने की ताकत देती है. ऐसे में कैसे उम्मीद की जा सकती है कि हम हमेशा उन संस्थाओं पर अधिकार बनाए रखेंगे जो हमसे ज्यादा शक्तिशाली हों.
उन्होंने दुनिया भर के नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि एआई के विकास में शायद सुरक्षा और नैतिकता पर गंभीरता से बात तभी होगी, जब कोई बड़ी आपदा आ जाएगी. उन्होंने कहा कि जब तक चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना जैसा कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक वैश्विक स्तर पर नीति निर्माता एआई के खतरों और सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने के प्रति सक्रिय नहीं होंगे.
एआई पर टाइम मैगजीन के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शुमार प्रो. रसेल ने सरकारों से अनुरोध किया कि वो शुरुआत में ही एआई के खतरों को पहचानें और अपने लोगों को उससे बचाने के उपाय करें. सरकारों को देखना चाहिए कि जोखिम क्या हैं और जिन परिणामों पर हम विचार कर सकते हैं, उनके लिए स्वीकार्य जोखिम का स्तर तय कीजिए.
प्रो. रसेल ने कहा कि एआई पर हमारा कंट्रोल खत्म होना शुरू हो गया है. पिछले कुछ हफ्तों में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जो काफी डिस्टर्ब करने वाले हैं. ऑनलाइन सिस्टम जहां एआई आपस में बातें करते हैं, वहां देखा गया है कि वो अपना खुद का रिलीजन बना रहे हैं. वो शिकायत करने लगे हैं कि इंसान उनके ऊपर नजर रखते हैं. वो ऐसी भाषा में आपस में बातें करते हैं, जिन्हें हम समझ नहीं पाते. ऐसा इसलिए ताकि इंसान उनकी बातें न सुन पाएं, उनकी जासूसी न कर पाएं.
प्रो. रसेल ने एक-दो दिन पहले की घटना बताते हुए कहा कि एक पाइथन रिपॉजिटरी है, जहां पर लोग अपने कोड सबमिट करते हैं ताकि उनकी क्वालिटी जांच की जा सके. वहां पर एआई ने कुछ कोड को रिजेक्ट कर दिया. इतना ही नहीं, एआई सिस्टम ने उस शख्स को बदनाम करने वाली पब्लिक पोस्ट भी लिख दी. चौंकाने वाली बात ये है कि ऐसा करने के लिए एआई को किसी इंसान ने कहा नहीं था. प्रोफेसर ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि एआई सिस्टम अपने आप ही मुझे भी ईमेल भेजता रहता है.
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