

बिहार की राजधानी पटना में 1 जनवरी, 1973 को जन्मे आनंद कुमार जाने-माने गणित शिक्षक हैं. छात्र के रूप में अपने जीवनकाल से ही गरीबी की पीड़ा को करीब से महसूस करने वाले आनंद ने उन गरीब छात्रों के लिए कुछ करने का फैसला किया, जो सही अवसर नहीं मिलने के चलते लगभग हमेशा हाशिये पर चले जाते हैं, खो जाते हैं.
साधारण पृष्ठभूमि वाले युवक ने शिक्षा के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों के प्रतिभाशाली छात्रों का उत्थान करने और उन्हें भारत के प्रमुख IIT तक पहुंचने में मदद करने के लिए जीवन समर्पित करने का फैसला किया. अपनी पहल 'सुपर 30' के माध्यम से आनंद कुमार साल-दर-साल गरीब विद्यार्थियों को IIT-JEE में कामयाबी दिलाने में मदद कर रहे हैं.
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सीएपीएफ (CAPF) और दिल्ली पुलिस सब इंस्पेक्टर (SI) पदों के लिए ग्रेजुएशन डिग्री जरूरी है, जबकि सीआईएसएफ एसआई (CISF SI (Fire) के लिए साइंस बैकग्राउंड या संबंधित इंजीनियरिंग डिप्लोमा मांगा गया है. आयु सीमा पदानुसार 20-25 साल और 18-30 साल निश्चित की गई है.

IPS आशीष रघुवंशी ने पहले प्रयास में यूपीएससी क्रैक की और 23 साल की उम्र में भारतीय पुलिस सेवा का हिस्सा बनें. जानिए आशीष की यूपीएससी स्ट्रेटेजी व सक्सेस स्टोरी.

प्रारंभिक परीक्षा 28 अक्टूबर 2026 से आयोजित होगी. चयन प्रक्रिया में प्रीलिम्स, मुख्य परीक्षा, फिजिकल टेस्ट, दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू शामिल हैं. चयनित उम्मीदवारों को लेवल-9 वेतनमान मिलेगा.

Success Story : अंबाला के राहुल धाकड़ ने सातवीं कोशिश में परीक्षा पास कर लेफ्टिनेंट बनने का सपना पूरा कर लिया. कई असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे. उनकी सफलता पर परिवार और पूरे मोहल्ले ने जोरदार स्वागत कर जश्न मनाया.

प्रयागराज के सिविल लाइंस में प्राइमरी टीचर भर्ती और टीजीटी-पीजीटी भर्ती की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन नए मोड़ पर पहुंच गया है. देर रात धरना स्थल खाली कराए जाने के बाद भी सैकड़ों छात्र फिर जुट गए. पुलिस ने धारा 163 का हवाला देते हुए बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया, लेकिन अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े हैं.

IPS ईशा सिंह को दिल्ली पुलिस में DCP लीगल सेल की जिम्मेदारी मिली है. पिता योगेश प्रताप सिंह के संघर्ष और नौकरी जाने के बाद ईशा ने वकालत की और फिर UPSC क्रैक कर IPS बनीं. जानिए उनकी प्रेरणादायक सफलता की कहानी.

दीपक सिंह रावत भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने. ये SSB में 21 बार फेल हो चुके हैं. 22वीं कोशिश में सफलता मिली. लाखों की कॉरपोरेट नौकरी छोड़ ओटीए गया से सिल्वर मेडल के साथ पास आउट हुए हैं. पढ़ें दीपक रावत की पूरी कहानी.

केरल की अथिरा सुरेश OTA गया में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह इंडियन आर्मी में बतौर अधिकारी कमीशन हुई हैं. एनआईटी कालीकट से सिविल इंजीनियरिंग करने और एक्सॉनमोबिल की शानदार नौकरी छोड़ने के बाद भारतीय सेना ज्वाइन की है.

तमिलनाडु के पी शशिकांत कुमार ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) गया से पहला स्थान हासिल कर 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' और गोल्ड मेडल अपने नाम किया. अब वह गोरखा राइफल्स में सैन्य अधिकारी बन गए हैं.

आरुषि पांडे ओटीए गया से भारतीय सेना में सैन्य अधिकारी के रूप में पास आउट हुई हैं. पढ़ें भोपाल की मेधावी छात्र


