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इस तरह आपके फेफड़ों को बीमार बनाती है प्रदूषित हवा, जानिए क्या है बचने के उपाय

इस तरह आपके फेफड़ों को बीमार बनाती है प्रदूषित हवा, जानिए क्या है बचने के उपाय
प्रदूषित हवा आपके फेफड़ों को दे रही ये 5 बड़े नुकसान

आज दुनिया भर में वर्ल्ड एनवोर्मेन्ट डे यानी विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day 2026) मनाया जा रहा है. इस वक्त पर्यावरण को लेकर सभी बड़ी चुनौती प्रदूषण है. खासकर वायु प्रदूषण लोगों को लगातार बीमार बना रहा है. एक आंकड़े के मुताबिक हर साल लगभग 50 लाख लोग वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के चपेट में आकर इसका शिकार होते हैं. दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता को लेकर लगातार बात होती है और इस पर कदम उठाए जाने के दावे भी होते हैं, लेकिन राजधानी और आस-पास के क्षेत्र में एयर क्वालिटी अब भी खराब बनी हुई है. क्या आप जानते हैं कि खराब हवा में सांस लेना आपके फेफड़ों को कितने बड़े जोखिम में डालता है.

प्रोफेसर. (डॉ.) अरविंद कुमार से ( चेयरमैन, लंग ट्रांसप्लांट मेदांता गुरूग्राम) ने NDTV से बातचीत कर बताया कि कैसे वायु प्रदूषण से फेफड़ों पर क्या बुरा असर दाल रहा है. 

वायु प्रदूषण से फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है? | How Does Air Pollution Affect The Lungs

जब भी आप सांस लेते हैं, तो आप सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं, बल्कि दूसरी चीजें भी अंदर लेते हैं. हवा में धूल, धुआं, केमिकल और ऐसी ही दूसरी बहुत छोटी और न दिखने वाली चीजें होती हैं. ये इतनी छोटी होती हैं कि आमतौर पर दिखाई नहीं देतीं, लेकिन सांस लेने पर ये आपके फेफड़ों में गहराई तक जा सकती हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की एक स्टडी के अनुसार, वायु प्रदूषण से निकलने वाले छोटे-छोटे प्रदूषक तत्वों के ज्यादा संपर्क में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है.

प्रदूषित हवा से फेफड़ों पर होने वाला असर | Impact of polluted air on the lungs)

सांस लेने में तकलीफ

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा की गई एक रिसर्च के अनुसार वायु प्रदूषण का फेफड़ों पर बुरा असर डाल रहा है. प्रदूषित हवा की वजह से सांस लेना मुश्किल हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), अस्थमा या फेफड़ों से जुड़ी दूसरी बीमारियां हैं.

सांस की नली में जलन

प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों से नाक के रास्ते, फेफड़ों और गले में जलन और सूखापन हो सकता है. आपको जलन महसूस हो सकती है या बार-बार खांसी आ सकती है.

फेफड़ों को लंबे समय तक नुकसान

वायु प्रदूषण के लगातार संपर्क में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है और COPD जैसी बीमारियां हो सकती हैं.

फेफड़ों में संक्रमण

वायु प्रदूषण से प्रभावित फेफड़ों में निमोनिया या ब्रोंकाइटिस जैसे संक्रमण होने का खतरा ज्यादा होता है.

मौजूदा बीमारियों का बढ़ना

जिन लोगों को दिल की बीमारी, अस्थमा या एलर्जी है, वे अगर प्रदूषित हवा में रहते हैं या किसी ऐसी जगह पर रहते हैं जहां एयर क्वालिटी अच्छी नहीं है तो उनके लक्षण बढ़ सकते हैं.

एयर पॉल्यूशन से अपने फेफड़ों को कैसे बचाएं?

  • आप एयर पॉल्यूशन को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं कर सकते, लेकिन कुछ तरीके हैं जिनसे आप इनके संपर्क से बच सकते हैं या कम कर सकते हैं. जैसे-
  • हवा में मौजूद हानिकारक कणों को रोकने के लिए मास्क पहनें.
  • बाहर निकलने से पहले अपने शहर की एयर क्वालिटी जरूर चेक करें. अगर हवा की क्वालिटी खराब है, तो बाहर न निकलें.
  • बाहर की प्रदूषित हवा को अपने घर या गाड़ी में आने से रोकें.
  • ज्यादा पॉल्यूशन वाली हवा में सांस लेने से बचने के लिए भीड़-भाड़ वाली सड़कों के बजाय शांत सड़कों का इस्तेमाल करें.
  • प्लास्टिक से बनी चीजों को जलाने से बचें, क्योंकि इनसे जहरीली गैस निकल सकती है.

अपने घर में हवा की क्वालिटी कैसे बेहतर बनाएं?

डॉक्टर अरविंद कुमार ने आगे बताया कि आप अपने घर में एयर क्वालिटी को बेहतर रखने के लिए अपने बाथरूम और किचन में एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करें, केमिकल वाले रूम स्प्रे के बजाय नियमित रूप से सफाई करें, हवा साफ करने वाले पौधे लगाएं और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें. ऐसा करने से आपको अपने घर में एयर क्वालिटी बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.

एयर पॉल्यूशन से किसे ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

  • बुजुर्ग लोग, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो जाती है.
  • बच्चे, क्योंकि उनके फेफड़े बहुत संवेदनशील होते हैं और अभी विकसित हो रहे होते हैं.
  • गर्भवती महिलाएं, क्योंकि हवा की खराब क्वालिटी मां और बच्चे दोनों के फेफड़ों को प्रभावित कर सकती है.
  • पॉल्यूशन उन लोगों में अटैक का कारण बन सकता है जिन्हें COPD या अस्थमा जैसी बीमारियां हैं या फेफड़ों से जुड़ी पहले से कोई बीमारी है.
  • डिलीवरी एजेंट, ट्रैफिक पुलिस और बाहर काम करने वाले अन्य लोगों को एयर पॉल्यूशन का सबसे ज्यादा खतरा होता है.

Expert: प्रोफेसर. (डॉ.) अरविंद कुमार से ( चेयरमैन, लंग ट्रांसप्लांट मेदांता गुरूग्राम)

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