आमतौर पर दुनिया भर की सरकारें क्लाइमेट चेंज और पॉल्यूशन पर ध्यान नहीं देतीं. इसके पीछे सबसे ठोस वजह है कि सरकारों को लगता है इससे कोई आर्थिक फायदा नहीं होगा. भारी-भरकम धन खर्च करना पड़ेगा और उससे सिवाए सामाजिक फायदे के और कोई लाभ नहीं मिलेगा. मगर अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक रुपये खर्च करने पर सरकारों को 15 रुपये का फायदा हो सकता है.
UN एनवायरनमेंट प्रोग्राम (UNEP) और क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन (CCAC) की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि क्लाइमेट चेंज और एयर पॉल्यूशन से एक साथ निपटने के लिए निवेश किए गए हर $1 से लगभग $15 का आर्थिक फायदा हो सकता है. यह फायदा क्लाइमेट चेंज और साफ हवा के लिए अलग-अलग काम करने की तुलना में ज्यादा है, और इसमें मार्केट और नॉन-मार्केट दोनों तरह के आर्थिक फायदे शामिल हैं. 'नीले आसमान के लिए साफ हवा के अंतर्राष्ट्रीय दिवस' पर जारी इस रिपोर्ट का शीर्षक 'हिडन एसेट्स: क्लाइमेट और साफ हवा के लिए कार्रवाई के आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी तर्क' है. यह क्लाइमेट और साफ हवा के लिए संयुक्त कार्रवाई का पहला व्यापक वैश्विक आर्थिक आकलन है.
UNEP की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंगर एंडरसन ने कहा, "बहुत लंबे समय से हम क्लाइमेट एक्शन को एक ऐसे खर्च के तौर पर देखते रहे हैं, जिसे बस किसी तरह मैनेज करना है, और एयर पॉल्यूशन को विकास का एक दुर्भाग्यपूर्ण नतीजा मानते रहे हैं. मगर यह रिपोर्ट इसके उलट बात कहती है. साफ हवा अगर रहे तो ये डेवलपमेंट, हेल्थ, फूड और एनर्जी सिक्योरिटी और क्लाइमेट स्टेबिलिटी की मुख्य वजह है. यह एक ऐसी संपत्ति है, जिसमें हमें निवेश करना चाहिए. इसके लिए पहले से ही कारगर समाधान मौजूद हैं. कमी बस सरकारों, वित्तीय संस्थानों और बिजनेस की ओर से उस निर्णायक नेतृत्व की है, जो इस संकट से निपटने के लिए जरूरी तेजी और तालमेल के साथ इन समाधानों को लागू कर सके.”
एंडरसन ने बताया कि 2022 में ग्लोबल GDP का 2.18 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर फॉसिल फ्यूल सब्सिडी पर और 2023 में ग्लोबल GDP का 9.3 प्रतिशत हिस्सा हेल्थकेयर पर खर्च किया गया. क्लाइमेट चेंज और एयर पॉल्यूशन पर कार्रवाई में हर साल की देरी से मार्केट और नॉन-मार्केट फायदों के रूप में सालाना 1.5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा यानी GDP का 0.5 प्रतिशत का नुकसान होगा. नॉन-मार्केट वेलफेयर फायदों को छोड़ भी दें, तो भी इन उपायों में निवेश किए गए हर 1 डॉलर के बदले लगभग 4 डॉलर का रिटर्न मिलता है.
15:1 का बेनिफिट-कॉस्ट रेश्यो (फायदा-लागत अनुपात) लगभग किसी भी दूसरे सेक्टर में तुरंत निवेश आकर्षित करेगा. क्लाइमेट और साफ हवा से जुड़े मिले-जुले एक्शन के मामले में ऐसा न होने की एकमात्र वजह यह है कि इससे मिलने वाला फायदा हेल्थ सिस्टम, प्रोडक्टिविटी और क्लाइमेट से होने वाले नुकसान को टालने जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में बंट जाता है, न कि किसी एक बैलेंस शीट में जमा होता है.”
इस असेसमेंट के स्वतंत्र को-चेयर एलियट हैरिस ने कहा, "हर साल की देरी से दुनिया को $1.5 ट्रिलियन से ज्यादा का नुकसान होता है, क्योंकि वे फायदे हमें दोबारा नहीं मिल पाएंगे. जो वित्त मंत्रालय और निवेशक जलवायु और हवा की गुणवत्ता को अलग-अलग बजट मदों में रखते हैं, वे ट्रिलियन डॉलर का नुकसान कर रहे हैं."
$15 के रिटर्न में मापे जा सकने वाले बाजार के फायदे हेल्थ सर्विस पर कम खर्च, ज्यादा लेबर प्रोडक्टिविटी और शारीरिक नुकसान से बचाव हैं. साथ ही समय से पहले होने वाली मौतों में कमी और हेल्दी लाइफ की आर्थिक कीमत भी इसमें शामिल है. 2025 में, इंसानों की वजह से होने वाले बाहरी एयर पॉल्यूशन (PM2.5 और ओज़ोन) के संपर्क में आने से दुनिया भर में अनुमानित 64 लाख (6.4 मिलियन) लोगों की समय से पहले मौत हुई.
घर के अंदर के एयर पॉल्यूशन से 20 लाख और लोगों की समय से पहले मौत हुई, जिनमें लगभग 3,00,000 बच्चे शामिल थे. पिछली रिपोर्टों के उलट, इस रिपोर्ट में एयर पॉल्यूशन से होने वाली बीमारियों के आर्थिक असर को भी शामिल किया गया है, जैसे कि हेल्थ सर्विस पर दबाव, उत्पादकता और लोगों की सेहत को होने वाला नुकसान.
रिपोर्ट में जिन उपायों पर गौर किया गया है, वे छह क्षेत्रों से जुड़े हैं . ये क्षेत्र एनर्जी और जीवाश्म ईंधन सिस्टम, इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट, एग्रीकल्चर सिस्टम, घरों में खाना पकाना और हीटिंग, और कचरा प्रबंधन हैं. इनमें लंबे समय तक डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने) के उपाय और मीथेन, ब्लैक कार्बन और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) जैसे खतरनाक प्रदूषकों को कम करने वाले उपाय दोनों शामिल हैं.
इन उपायों में रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी एफिशिएंसी, खाना पकाने और हीटिंग के लिए साफ-सुथरे तरीकों को बढ़ावा देना, वाहनों से निकलने वाले धुएं और उनकी दक्षता के लिए कड़े नियम, जांच और रखरखाव, इलेक्ट्रिक वाहन और कम सल्फर वाले शिपिंग ईंधन, तेल और गैस के रिसाव को कम करने और नियमित रूप से गैस छोड़ने (वेंटिंग और फ्लेयरिंग) को रोकने के लिए संबंधित गैस की रिकवरी, पशुधन और खाद का प्रबंधन, उर्वरकों का बेहतर इस्तेमाल, धान की खेती के बेहतर तरीके और फसल के अवशेष जलाने के विकल्प, ठोस कचरे और गंदे पानी का बेहतर प्रबंधन, और HFCs का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम करना शामिल है.
2050 तक, इन उपायों को पूरी तरह लागू करने से एयर पॉल्यूशन से होने वाली 14.4 करोड़ समय-पूर्व मौतों को रोका जा सकता है (जिनमें से 9.6 करोड़ मौतें सिर्फ बाहरी एयर पॉल्यूशन से होती हैं) और साथ ही पुरानी बीमारियों के करोड़ों मामलों को भी रोका जा सकता है.
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