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सांसों पर संकट: 2025 में दिल्ली फिर बनी दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी, जानें आपकी सेहत पर इसका क्या होगा असर

सांसों पर संकट: 2025 में दिल्ली फिर बनी दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी, जानें आपकी सेहत पर इसका क्या होगा असर
Pollution Statistics 2025 : लगातार खराब हवा में रहने से नींद न आना, चिड़चिड़ापन और हर वक्त थकान महसूस होने जैसी समस्याएं भी देखी जा रही हैं.

Delhi Pollution stastics 2025 : दिल्ली वालों के लिए एक बुरी खबर है. साल 2025 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली एक बार फिर देश की सबसे प्रदूषित राजधानी बन गई है. यहां की हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि साल के 365 दिनों में से 285 दिन प्रदूषण का स्तर तय मानकों से कहीं ज्यादा रहा. आंकड़ों की बात करें तो दिल्ली में PM10 का सालाना औसत स्तर 197 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया. आपको जानकर हैरानी होगी कि सरकार द्वारा तय किया गया सुरक्षित मानक सिर्फ 60 है. यानी दिल्ली की हवा सामान्य से तीन गुना ज्यादा खराब है. जो कि आपकी सेहत के लिए खतरे की घंटी है. ऐसे में आइए जानते हैं PM10 क्या है और इससे सेहत को होने वाले नुकसान.

क्या है ये PM10 और ये शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

PM10 हवा में मौजूद वे बारीक कण हैं जो धूल, धुएं और गंदगी से बनते हैं. ये इतने छोटे होते हैं कि जब हम सांस लेते हैं, तो ये सीधे हमारे फेफड़ों में घुस जाते हैं.

प्रदूषण का सेहत पर 'लॉन्ग टर्म' असर

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि प्रदूषण से सिर्फ खांसी या जुकाम होता है, लेकिन सच इससे कहीं ज्यादा डरावना है. लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने के ये गंभीर नुकसान हो सकते हैं:

फेफड़ों की उम्र कम होना

दिल्ली में रहने वाले लोगों के फेफड़े समय से पहले ही बूढ़े हो रहे हैं. इससे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां अब हर दूसरे घर की कहानी बन गई हैं.

दिल की बीमारियां

प्रदूषित कण खून में मिलकर धमनियों में रुकावट पैदा कर सकते हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.

बच्चों के विकास पर असर

जहरीली हवा में सांस लेने वाले बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास रुक सकता है. उनके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते.

मानसिक तनाव और थकान

लगातार खराब हवा में रहने से नींद न आना, चिड़चिड़ापन और हर वक्त थकान महसूस होने जैसी समस्याएं भी देखी जा रही हैं.

प्रदूषण में सेहत का कैसे रखें ख्याल

जब हवा इतनी खराब हो, तो खुद को बचाना हमारी जिम्मेदारी है. कोशिश करें कि सुबह और शाम (जब प्रदूषण ज्यादा हो) बाहर न निकलें. घर से निकलते वक्त अच्छी क्वालिटी का मास्क पहनें और घर के अंदर हवा को साफ रखने के लिए पौधे लगाएं.

दिल्ली की ये स्थिति हमें चेतावनी दे रही है कि अगर हमने अब भी प्रकृति का ध्यान नहीं रखा, तो आने वाला वक्त और भी मुश्किल भरा हो सकता है.
 



(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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