उत्तराखंड में चार धाम यात्रा में भारी संख्या में यात्री आ रहे हैं. अब तक 26 लाख से ज्यादा यात्री उत्तराखंड के चारों धामों में दर्शन कर चुके हैं. इसके अलावा लाखों की संख्या में पर्यटक भी उत्तराखंड में आ चुके हैं तो वहीं, चारों धामों के अलावा उत्तराखंड के पर्यटक स्थलों में आने वाले वाहनों की संख्या भी लाखों में हैं. लगातार आ रहे वाहनों से निकलने वाला धुआं उत्तराखंड की आबोहवा खराब कर रहा है. इसके अलावा जंगलों में लगने वाली आग भी वायु प्रदूषण बढ़ा रही है. इस वजह से ब्लैक कार्बन का तेजी से उत्सर्जन हो रहा है और यह सीधे हिमालय के ग्लेशियर (Himalayan Glacier) पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है.
उत्तराखंड में इस वक्त चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) अपनी चरम पर है तो पर्यटक स्थलों पर यात्रियों की संख्या की भरमार है. आए दिन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वाहनों की लंबी-लंबी कतारे देखने को मिल रही है. उत्तराखंड आने का पर्यटक और श्रद्धालु हर साल नया रिकॉर्ड बना रहे हैं, लेकिन पर्यटक और श्रद्धालु उत्तराखंड में आ तो रहे हैं, पर इसका खामियाजा उत्तराखंड को भुगतना पड़ रहा है.
हालांकि, इससे उत्तराखंड आर्थिक मजबूत तो हो रहा है, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से राज्य को इसका भारी नुकसान हो रहा है. उत्तराखंड के उच्च हिमालय के ग्लेशियर पर इसका सीधा प्रभाव हो रहा है तो दूसरा लगातार वायु प्रदूषण बढ़ रहा है. हर साल उत्तराखंड में यात्रियों की संख्या बढ़ रही है तो उनके साथ आने वाले वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. वाहनों से निकलने वाला धुआं खासकर डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं सीधा वायु प्रदूषण फैला रहा है. डीजल वाहनों से निकलने वाला दुआ जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा सबसे ज्यादा होती है और उसके कार्बन पार्टिकल्स सीधे हिमालय के ग्लेशियर पर इकट्ठा हो रहे हैं, जिससे हिमालय के ग्लेशियर का पिघलना और तेजी से हो रहा है.
इसकी वजह यह है कि ब्लैक कार्बन पार्टिकल्स वायुमंडल में उड़कर सीधे हिमालय के ग्लेशियर पर बैठ रहे हैं और हिमालय के ग्लेशियर पर ब्लैक कार्बन पार्टिकल्स होने का मतलब सूर्य की रोशनी सीधे रिफ्लेक्टर ना होकर यह कार्बन पार्टिकल्स सुख रहे हैं और ग्लेशियर की पिघलने की रफ्तार ज्यादा हो रही है. इसके अलावा उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में जंगलों की आग ने ने भी हिमालय के ग्लेशियर पर सीधा असर कर रहे हैं.
दुनिया पहले ही ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming), जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की मार झेल रही है, जिसकी वजह से मौसमी चक्र में बदलाव हो रहा है. गर्मी, सर्दी, बारिश और अन्य ऋतु समय पर नहीं आ रही हैं. लगातार चार धाम यात्रा या उत्तराखंड के उच्च हिमालय क्षेत्र (Himalayan Region) में वाहनों की संख्या बढ़ाने की वजह से लगातार निकलने वाला धुआं हिमालय क्षेत्र में ब्लैक कार्बन (Black Corbon) को बढ़ा रहा है, जिसकी वजह से तापमान में वृद्धि हो रही है और वायुमंडल भी गर्म हो रहा है.
विशेषज्ञ कहते हैं कि हिमालय के ग्लेशियर पर डीजल वालों से निकलने वाले धुएं में ब्लैक कार्बन की मात्रा ज्यादा होती है. इसके अलावा फॉरेस्ट फायर और लोगों द्वारा घरों, खेतों में लगने वाली आग भी बड़ी मात्रा में ब्लैक कार्बन का उत्सर्जन करती है.
दून यूनिवर्सिटी (Doon University) के प्रोफेसर श्रीधर बताते हैं कि उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में ज्यादा वाहनों के आने के कारण कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, क्योंकि ज्यादातर डीजल के वाहन होते हैं और उनसे निकलने वाले धुएं में CO2 की मात्रा ज्यादा होती है. उसमें ब्लैक कार्बन पार्टिकल्स तेजी से वायुमंडल में ट्रैवल कर हिमालय के ग्लेशियरों पर पहुंचकर ग्लेशियर पर सीधा इसका प्रभाव छोड़ते हैं और ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं.
प्रोफेसर श्रीधर बताते हैं कि जब उत्तराखंड में गर्मियों के समय जंगलों में आग लगी होती है, तब वाहनों से निकलने वाले धुएं का रेशो 40% और धुएं का 60% प्रभाव होता है. जब फॉरेस्ट फायर नहीं होती है और इस तरह वाहनों की संख्या ज्यादा होती है, तब 60% वाहनों से निकलने वाले धुएं का प्रभाव होता है और बाकी 40% अन्य कारणों का.
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पर्यावरण विद् प्रोफेसर एसपी सती कहते हैं कि तेजी से सड़कों का विकास उच्च हिमालय क्षेत्र में हुआ है, जिसकी वजह से वाहनों की सीधी पहुंच उत्तराखंड के चारों धामों के साथ अन्य पर्यटक स्थलों पर भी हो गई है. ऐसे में लगातार वाहन पहुंचने से उनसे निकलने वाला धुआं का असर सीधे हिमालय के ग्लेशियर पर पड़ रहा है. गाड़ियों से निकलने वाले धुएं में ज्यादातर कार्बन डाइऑक्साइड होती है और कार्बन डाइऑक्साइड के ब्लैक कार्बन पार्टिकल सीधे उड़ कर हिमालय के ग्लेशियर पर बैठ रहे हैं.
ऐसे में हिमालय के ग्लेशियर की बर्फ में पढ़ने वाली सूर्य की गर्मी रिफ्लेक्ट होने के वजह ब्लैक कार्बन के कारण तेजी से सोख रही है और ग्लेशियर पिघल रहे हैं. प्रोफेसर एसपी सती कहते हैं कि उच्च हिमालय क्षेत्र में ब्लैक टॉप सड़के होने की वजह भी वायुमंडल को गर्म कर रही है. एसपी सती का कहना है कि यह ब्लैक टॉप सड़के नहीं बल्कि हिट एलाइनमेंट है.
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Written by: श्रेया त्यागी© Copyright NDTV Convergence Limited 2026. All rights reserved.