
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार के बाद आज भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है. ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को लगे झटके के बाद दलाल स्ट्रीट में दिवाली दिख रही है. शेयर मार्केट खुलते ही सेंसेक्स में 1500 अंकों का उछाल देखा गया. वहीं दोपहर 1:50 बजे सेंसेक्स में करीब 2100 अंकों का उछाल देखा गया और ये 79,370 के करीब पहुंच गया. वहीं निफ्टी 50 भी करीब 600 अंकों के उछाल के साथ 24,560 के पार पहुंच गया.
BSE लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की बढ़त दर्ज की गई. यानी निवेशकों के पोर्टफोलियो में इतने ही रुपये बढ़ गए. इसके पीछे कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है. 30 शेयरों वाले सेंसेक्स पैक में से 25 कंपनियों के शेयर ग्रीन में कारोबार करते दिख रहे हैं.

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद वैश्विक बाजारों से मिले अच्छे संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी करीब 2 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ खुले. सेंसेक्स 1,609.54 अंक यानी 2.08 प्रतिशत बढ़कर 78,910.94 पर खुला. वहीं, निफ्टी ने 417.45 अंक यानी 1.74 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,378.05 पर कारोबार शुरू किया.
शुरुआती कारोबार में वित्तीय कंपनियों के शेयरों ने तेजी की अगुआई की. निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा, जबकि निफ्टी रियल्टी में 1.86 प्रतिशत की बढ़त रही. सभी सेक्टर के सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे थे.
निफ्टी सीमेंट, ऑटो, आईटी, ऑयल एंड गैस और सरकारी बैंकों के सूचकांकों में 1.82 प्रतिशत तक की तेजी दिखी. एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल, मीडिया और केमिकल्स सेक्टर भी 1 से 1.5 प्रतिशत तक बढ़े.
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी लगभग 23,904 के स्तर पर मौजूद 200 दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से ऊपर बना हुआ है. यह तकनीकी तौर पर बाजार की मजबूती का संकेत है.
विश्लेषकों ने कहा कि बाजार की रफ्तार बताने वाला संकेतक RSI बढ़कर 68.55 पर पहुंच गया है. इससे मजबूत तेजी का संकेत मिलता है, हालांकि कम समय में मुनाफावसूली की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
निफ्टी को 24,000 से 24,200 के दायरे में सहारा मिल सकता है. वहीं, ऊपर की ओर 24,500 से 24,700 के बीच बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है.
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अमेरिकी चुनाव नतीजों पर शुरुआती प्रतिक्रिया थमने के बाद वहां लंबे राजनीतिक टकराव की चिंता उभर सकती है. उनके मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कमजोर पड़कर बैठने के बजाय संसद से पारित प्रस्तावों को रोकने के लिए वीटो का इस्तेमाल कर सकते हैं.
बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार चौथे कारोबारी सत्र में खरीदार बने रहे. उन्होंने शुद्ध रूप से 7,284 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. ये अक्टूबर 2025 के बाद एक कारोबारी दिन में सबसे बड़ा निवेश बताया गया. दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगातार चौथे दिन अपनी हिस्सेदारी घटाई और शुद्ध रूप से 3,712 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
एनर्जी मार्केट में भारी बिकवाली के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 10 प्रतिशत गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बंद हुआ. अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी घटी. 10 साल के बॉन्ड की यील्ड लगभग 4.89 प्रतिशत पर आ गई, जिससे दुनियाभर के बाजारों में शेयर जैसी जोखिम वाली संपत्तियों को समर्थन मिला. ईरान से जुड़े तनाव की चिंता कम होने और अमेरिकी डॉलर के कमजोर पड़ने से भी वैश्विक निवेशकों का रुझान शेयर बाजारों की ओर बढ़ा है.
रात में अमेरिकी शेयर बाजारों में आई तेजी से भी भारतीय बाजार को सहारा मिला. डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 3 प्रतिशत से ज्यादा उछला. यह चार दशक से अधिक समय में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद उसका सबसे मजबूत प्रदर्शन रहा. एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट भी 1.4 प्रतिशत से ज्यादा बढ़े. अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी की स्पष्ट जीत के बाद चुनाव से जुड़ी अनिश्चितता घटने से बाजार को मजबूती मिली.
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ट्रंप की चुनावी हार पर जेलेंस्की, मोजतबा और किम की बहन का आया रिएक्शन; बाकी देशों ने भी दिए बयान
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Reported by: Akshobh Giridharadasकिम की प्रभावशाली बहन किम यो जोंग ने बुधवार को संकेत दिया कि वाशिंगटन के साथ फिर से बातचीत करने में उनकी कोई खास दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने कहा कि प्योंगयांग को ऐसे अविश्वसनीय और शत्रुतापूर्ण लोगों के साथ आमने-सामने बैठने की कोई जरूरत नहीं है.
अमेरिकी अरबपति और X के मालिक एलन मस्क ने मिडटर्म चुनाव के दौरान किया गया अपना चर्चित पोस्ट हटा दिया है, जिसमें मतदाताओं से रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन की अपील की गई थी.
अमेरिका का मिडटर्म चुनाव कई मायनों में काफी अहम है. इसने अब तक के चुनावी गणित को बदलकर रख दिया है. डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ों में डेमोक्रेट्स ने सेंध लगा दी है.
अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है. एक वजह भारतीय-अमेरिकियों का साथ न मिलना भी है.
भी की स्थिति में ये लग रहा कि वेंस ईरान युद्ध से खुद को दूर दिखाना चाहते हैं, जिससे 2028 के चुनाव में इसका कोई असर नहीं दिखे. वहीं ट्रंप के पास ईरान युद्ध पर तुरंत यूटर्न लेना अभी मुश्किल लग रहा है.
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अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के बाद रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर पूरा कंट्रोल खत्म हो गया है. इसके बाद भारत के लिए अमेरिका से ट्रेड डील की जल्दबाजी अब कम हो गई है, जो एक अच्छी खबर है- रिपोर्ट
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव वाले दिन से जब से फ्रांसीसी कलाकार ने यह आर्टवर्क दुनिया को दिखाया है, तब से इसने ऑनलाइन और ट्रंप टावर के आसपास मौजूद सबका ध्यान खींच लिया है. कई लोग रुककर इसकी तस्वीरें खींच रहे हैं.
अमेरिका की जनता ने दिखा दिया है कि यह लोकतंत्र सभी के लिए है, यहां विभाजनकारी राजनीति के लिए जगह नहीं है. इन मुस्लिम उम्मीदवारों ने इलाज, मकान, इमिग्रेशन, नागरिक अधिकार और इजरायल-फिलिस्तीन पर अमेरिका की नीति जैसे मुद्दों पर मिडटर्म चुनाव लड़ा था.
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार के बाद उधर कच्चा तेल धड़ाम और इधर भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल. निवेशकों की तो दिवाली से पहले ही दिवाली हो गई. जानिए सेंसेक्स और निफ्टी का क्या हाल है.
