
अमेरिका में दूसरी प्रेसिडेंशियल डिबेट वर्चुअल (US Presidential debate) होगी, इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) के उम्मीदवार जो वाइडेन (Joe Biden) अलग-अलग जगहों पर बैठकर डिबेट करेंगे. डिबेट कमीशन ने ये फ़ैसला ट्रंप के कोरोना पॉज़िटिव (Corona Positive) होने के बाद लिया है. हालांकि ट्रम्प ठीक होने का दावा कर रहे हैं लेकिन बाइडन ने साथ डिबेट करने को मना कर दिया था. इस बीच, ट्रंप ने वर्चुअल डिबेट में हिस्सा लेने से इंकार कर दिया है, उन्होंने कहा कि डिबेट कमीशन ने समय रहते इस बदलाव के बारे में नहीं बताया.
कमला हैरिस ने ट्रंप को सबसे नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति बताया, चीन के मुद्दे पर पेंस से भिड़ीं
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा वे अपना वक़्त जाया नहीं करेंगे. दूसरे प्रेसिडेंशियल डिबेट के लिए 15 अक्टूबर की तारीख़ मुकर्रर है. उधर बाइडेन ने कहा ट्रम्प हिस्सा न लें तब वो उस दिन वे डिबेट के मंच से अमेरिकी जनता से सीधी बात करेंगे. ट्रंप ने फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘‘यह व्यवस्था हमें स्वीकार्य नहीं है.'' वे संचालकों पर उनके डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी बाइडेन को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगा रहे हैं. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच बहस पर कुछ ही क्षण पहले डिबेट कमीशन ने कहा था कि दूसरी बहस डिजिटल माध्यमों से होने वाली है.
बहस के दौरान ट्रम्प को ‘विदूषक' कहने के लिए बाइडेन ने खेद जताया
डिबेट कमीशन ने मियामी में ट्रंप और बाइडेन का आमना-सामना होने से हफ्ते भर पहले बृहस्पतिवार सुबह यह घोषणा की. इसमें कहा गया है कि दोनों उम्मीदवार दूर से एवं अलग-अलग स्थानों से बहस में हिस्सा लेंगे जबकि बहस के संचालक मियामी में ही रहेंगे. ट्रंप के करीब एक सप्ताह पहले कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी और उन्होंने कहा था कि वह मियामी में मंच पर बाइडेन के साथ बहस करने को लेकर आशावादी हैं. वहीं, बाइडेन ने कहा, ‘‘जब तक राष्ट्रपति संक्रमित हैं, उन्हें और ट्रंप को बहस नहीं करनी चाहिए.'' बाइडेन ने बहस को लेकर पेनसिल्वेनिया में कहा, ‘‘हम बहुत सख्त दिशानिर्देशों का पालन करने जा रहे हैं.'' (भाषा से भी इनपुट)
COVID-19 से पीड़ित डोनाल्ड ट्रंप की सेहत पर अटकलों का दौर
चीन की दखल से चुनाव जीते थे बाइडेन- ट्रंप के इस आरोप की हवा उनकी अपनी सरकार निकाल चुकी
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहचीन ने की चोरी! अमेरिकी चुनाव के 22 करोड़ वोटर्स का डेटा उड़ाया- ट्रंप का बड़ा दावा
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहअमेरिका में चुनाव से पहले डर गए ट्रंप? इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के सभी 4 मेंबर को हटाया
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहFact Check: डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं. उनका आरोप है कि चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों की फाइलें गैर-कानूनी तरीके से हासिल कर ली थीं. लेकिन यह आरोप कितने सही हैं?
Donald Trump Primetime Speech on US Election Data: डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली 'इतनी खराब और कमजोर है कि इसे कोई नहीं बचा सकता.'
अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की ताकत और बढ़ गई है. इसी का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के सभी 4 मेंबर को हटा दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला की जीत के साथ कोलंबिया में दक्षिणपंथी राजनीति की फिर से सत्ता में वापसी हो गई है. इससे पहले 200 साल में केवल 4 साल ही दक्षिणपंथी सरकार रही है.
दो विश्व युद्ध और उसके बाद की दुनिया के युद्ध नतीजों और चुनाव नतीजों का हाल देख ट्रंप-नेतन्याहू को संभल जाना चाहिए.
हालिया रॉयटर्स/इप्सोस पोल के अनुसार, ट्रंप की रेटिंग इस कार्यकाल के सबसे निचले स्तर 36% पर पहुंच गई है, जिससे पार्टी को हाउस और सीनेट में बहुमत खोने का डर है.
LIVE: बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी आज कोलकाता और श्रीरामपुर में रैली कर सकते हैं. दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में तपती धूप और गर्मी से बुरा हाल है. पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है. देश-दुनिया का हर अपडेट यहां देखें.
Iran War: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक आ रहे हैं. ऐसे में ट्रंप पर युद्ध खत्म करने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है. इस युद्ध की वजह से पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं. जिसकी वजह से उनको आलोचना झेलनी पड़ रही है. शायद यही वजह है कि ट्रंप के मन में युद्ध खत्म करने का विचार आने लगा है.
हंगरी में विपक्षी नेता पीटर मैग्यार (Peter Magyar) और उनकी तिसा पार्टी ने चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए संसद की 199 सीटों में से 138 सीटों पर कब्जा कर लिया है.
हंगरी के संसदीय चुनाव में पीटर मैग्यार की तिज्सा पार्टी ने शानदार जीत दर्ज कर ओर्बन के 16 साल के शासन का अंत किया. विक्टर ओर्बन की हार का मुख्य कारण बढ़ती महंगाई और आर्थिक सुस्ती मानी जा रही है, जिससे जनता में निराशा थी.

