
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव (US Presidential Election 2024) की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं.अब डोनाल्ड ट्रंप बनाम जो बाइडेन का मुकाबला पक्का हो गया है. भारतीय-अमेरिकी निक्की हेली इस रेस से बाहर हो चुकी हैं. अब राष्ट्रपति पद का मुख्य मुकाबला डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन (Jo Biden Donald Trump) के बीच होना है. जो बाइडेन गुरुवार को अपनी स्टेट ऑफ द यूनियन स्पीड दी. अपनी स्पीच में वह अमेरिका के कई मुद्दों को उठाए, जिनमें उनके धुर-विरोधी डोनाल्ड ट्रंप की "बदला और प्रतिशोध" की राजनीति से बचना भी शामिल है. बता दें कि अमेरिका में नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होना है, ऐसे में जो बाइडेन की स्पीच काफी अहम रही. अपनी स्पीच के दौरान जो बाइडेन की वोटर्स को बताने की कोशिश रही कि ट्रंप के खिलाफ वही एक मात्र विकल्प हैं.
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व्हाइट हाउस के मुताबिक, जो बाइडेन ने रात 9 बजे (0200 GMT) प्राइमटाइम भाषण में कहा, "मेरे जीवन ने मुझे स्वतंत्रता और लोकतंत्र को अपनाना सिखाया है." बाइडेन ने ट्रंप का नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष करते हुए कहा, " मेरी उम्र के कुछ अन्य लोग, एक अलग कहानी देखते हैं, जो कि" नाराजगी, बदला और प्रतिशोध की एक अमेरिकी कहानी है, लेकिन वो मैं नहीं हूं." बता दें कि जो बाइडेन अमेरिका के सबसे उम्रदराज नेता हैं, जबकि डोनाल्ड ट्रंप उनके 4 साल साल छोटे हैं.
ट्रंप पर दो बार महाभियोग चलाया गया है. उनको अपनी हार को पलटने की कोशिश करने के लिए दो बार महाभियोग का सामना करना पड़ा. अपने चुनावी भाषणों में जो बाइडेन लगातार इस बात को अमेरिकी लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए खतरा बताते रहे हैं. अपने भाषण में बाइडेन ने रिपब्लिकन अबॉर्शन विरोधियों का भी जिक्र किया.उन्होंने कहा कि उन्हें "अमेरिका में महिलाओं की शक्ति के बारे में कुछ भी नहीं पता है," बता दें कि यह डेमोक्रेट का एक मुख्य चुनावी मुद्दा है.
अमेरिका में 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होना है. ट्रंप के पिछले कार्यकाल में उनके द्वारा लिए गए फैसले और 6 जनवरी 2021 को उनके समर्थकों का अमेरिकी संसद पर किए गए हमले के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि अगर ट्रंप की वापसी हुई तो विश्व की राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा. ट्रंप के ऊपर अमेरिका में उस मामले को लेकर 91 से अधिक मामले दर्ज हैं.
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दो विश्व युद्ध और उसके बाद की दुनिया के युद्ध नतीजों और चुनाव नतीजों का हाल देख ट्रंप-नेतन्याहू को संभल जाना चाहिए.
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हंगरी में विपक्षी नेता पीटर मैग्यार (Peter Magyar) और उनकी तिसा पार्टी ने चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए संसद की 199 सीटों में से 138 सीटों पर कब्जा कर लिया है.
हंगरी के संसदीय चुनाव में पीटर मैग्यार की तिज्सा पार्टी ने शानदार जीत दर्ज कर ओर्बन के 16 साल के शासन का अंत किया. विक्टर ओर्बन की हार का मुख्य कारण बढ़ती महंगाई और आर्थिक सुस्ती मानी जा रही है, जिससे जनता में निराशा थी.

