
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव इस बार भारतीयों के लिए काफी उम्मीदों भरा है. ऐसा इसलिए हैं कि पहली बार भारतीय मूल का एक अमेरिकी वहां राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल है.हम बात कर रहे हैं उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की. वो डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं.राष्ट्रपति जो बाइडेन के उम्मीदवारी की दौड़ से हटने के बाद उम्मीदवार बनाई गई हैं. इसके बाद से भारतीय मूल के अमेरिकियों में कमला हैरिस के लिए जबरदस्त समर्थन देखने को मिला है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि भारतीय-अमेरिकियों की यह समर्थन हैरिस के लिए तो है लेकिन उनकी पार्टी के लिए नहीं.यह बात एक सर्वेक्षण में सामने आई है.
इंडियन अमेरिकन पॉलिटिकल एटीट्यूड नाम के इस सर्वेक्षण के आंकड़ों को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए काम करने वाले कार्नेगी एंडोमेंट में प्रकाशित किया गया है. इस सर्वेक्षण के आंकड़ों को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए काम करने वाले कार्नेगी एंडोमेंट में प्रकाशित किया गया है.

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस.
अमेरिका में भारतीय मूल के करीब 52 लाख लोग रहते हैं. इनमें से करीब 26 लाख लोग इस राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करेंगे. भारतीय अमेरिकियों की आबादी अमेरिका में रह रहे प्रवासियों में दूसरे नंबर की है.भारतीयों की यह संख्या उन्हें अमेरिका की राजनीति में महत्वपूर्ण बनाती है.हैरिस की उम्मीदवारी के बाद भारतीय मूल के अमेरिकियों का महत्व अमेरिकी चुनाव में काफी बढ़ गया है.
भारतीय मूल का होने की वजह से ज्यादातर भारतीय अमेरिकी कमला हैरिस के समर्थन में हैं. लेकिन कमला हैरिस की पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति उनके समर्थन में कमी देखी गई है. एक सर्वेक्षण (इंडियन अमेरिकन पॉलिटिकल एटीट्यूड) के आंकड़े के मुताबिक 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में 56 फीसदी अमेरिकी-भारतीय डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन में थे, लेकिन 2024 के चुनाव में यह आंकड़ा घटकर 47 फीसदी पर आ गया है.

इस सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय मूल के 61 फीसदी अमेरिकी रजिस्टर्ड मतदाता डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस को वोट देने की योजना बना रहे हैं. वहीं 32 फीसदी भारतीय मूल के अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप को वोट देने की योजना बना रहे हैं. ट्रंप को समर्थन और वोट देने वालों का आंकड़ा पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़ा है.
इस सर्वेक्षण में शामिल कम से कम 47 फीसदी भारतीय ने खुद को डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थक बताया. इससे पहले 2020 के चुनाव में ऐसे लोगों की संख्या करीब 56 फीसदी थी.वहीं रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक भारतीय अमेरिकियों की संख्या 21 फीसदी पर बरकरार है. सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि 26 फीसद भारतीयों ने खुद को निष्पक्ष बताया.

भारतीय मूल की अमेरिकी महिलाओं में कमला हैरिस का समर्थन अधिक है.
सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय मूल के अमेरिकियों में ट्रंप का समर्थन करने वालों में महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक हैं. यानी दोनों उम्मीदवारों के समर्थकों की संख्या में लिंग के आधार पर अंतर है. भारतीय मूल की अमेरिकी महिलाओं में कमला हैरिस के लिए समर्थन अधिक है.कमला हैरिक को समर्थन करने वाली महिलाओं की संख्या करीब 67 फीसदी है. वहीं केवल 53 फीसद पुरुष मतदाताओं ने ही कहा कि वो कमला हैरिस को वोट देंगे.वहीं भारतीय मूल की महिलाओं में से केवल 22 फीसदी ने ही कहा कि वो ट्रंप को वोट देंगे. वहीं 39 फीसदी पुरुषों ने कहा कि वो डोनल्ड ट्रंप को वोट देंगे.
ये भी पढ़ें: 2 मिनट की देरी और पर्चा नहीं भर सके पूर्व कांग्रेस मंत्री अनीस अहमद, ऐसे निकाला गुस्सा
चीन की दखल से चुनाव जीते थे बाइडेन- ट्रंप के इस आरोप की हवा उनकी अपनी सरकार निकाल चुकी
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहचीन ने की चोरी! अमेरिकी चुनाव के 22 करोड़ वोटर्स का डेटा उड़ाया- ट्रंप का बड़ा दावा
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहअमेरिका में चुनाव से पहले डर गए ट्रंप? इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के सभी 4 मेंबर को हटाया
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहFact Check: डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं. उनका आरोप है कि चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों की फाइलें गैर-कानूनी तरीके से हासिल कर ली थीं. लेकिन यह आरोप कितने सही हैं?
Donald Trump Primetime Speech on US Election Data: डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली 'इतनी खराब और कमजोर है कि इसे कोई नहीं बचा सकता.'
अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की ताकत और बढ़ गई है. इसी का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के सभी 4 मेंबर को हटा दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला की जीत के साथ कोलंबिया में दक्षिणपंथी राजनीति की फिर से सत्ता में वापसी हो गई है. इससे पहले 200 साल में केवल 4 साल ही दक्षिणपंथी सरकार रही है.
दो विश्व युद्ध और उसके बाद की दुनिया के युद्ध नतीजों और चुनाव नतीजों का हाल देख ट्रंप-नेतन्याहू को संभल जाना चाहिए.
हालिया रॉयटर्स/इप्सोस पोल के अनुसार, ट्रंप की रेटिंग इस कार्यकाल के सबसे निचले स्तर 36% पर पहुंच गई है, जिससे पार्टी को हाउस और सीनेट में बहुमत खोने का डर है.
LIVE: बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी आज कोलकाता और श्रीरामपुर में रैली कर सकते हैं. दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में तपती धूप और गर्मी से बुरा हाल है. पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है. देश-दुनिया का हर अपडेट यहां देखें.
Iran War: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक आ रहे हैं. ऐसे में ट्रंप पर युद्ध खत्म करने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है. इस युद्ध की वजह से पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं. जिसकी वजह से उनको आलोचना झेलनी पड़ रही है. शायद यही वजह है कि ट्रंप के मन में युद्ध खत्म करने का विचार आने लगा है.
हंगरी में विपक्षी नेता पीटर मैग्यार (Peter Magyar) और उनकी तिसा पार्टी ने चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए संसद की 199 सीटों में से 138 सीटों पर कब्जा कर लिया है.
हंगरी के संसदीय चुनाव में पीटर मैग्यार की तिज्सा पार्टी ने शानदार जीत दर्ज कर ओर्बन के 16 साल के शासन का अंत किया. विक्टर ओर्बन की हार का मुख्य कारण बढ़ती महंगाई और आर्थिक सुस्ती मानी जा रही है, जिससे जनता में निराशा थी.

