
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वायु प्रदूषण से निपटने की दिशा में सोमवार को एक बड़ा कदम उठाया. उन्होंने दिल्ली में सोमवार को 6 नए वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (Continuous Ambient Air Quality Monitoring Stations, CAAQMS) और 100 ‘वायु रक्षक' पहल का शुभारंभ किया. मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रदूषण के विरुद्ध लड़ाई केवल सर्दियों की नहीं, बल्कि पूरे साल चलने वाला अभियान है और दिल्ली सरकार इसके लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है. दिल्ली सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के साथ विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे. मुख्यमंत्री ने निगरानी स्टेशनों का ऑनलाइन उद्धाटन किया और ‘वायु रक्षक' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया.
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि दिल्ली में पिछली सरकार की घोर लापरवाही के चलते वायु प्रदूषण लगातार गंभीर बन गया, जिसे नियंत्रित करने के लिए उनकी सरकार लगातार गंभीर व प्रभावी कदम उठा रही है. उन्होंने कहा कि प्रदूषण पर काम करना सिर्फ तीन-चार महीनों की जिम्मेदारी नहीं है. यह 365 दिन का विषय है. दिल्ली सरकार अपने संकल्प को आज फिर दोहरा रही है कि राजधानी को साफ, स्वच्छ और सांस लेने योग्य हवा देना हमारा कर्तव्य है.

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि एयर क्वालिटी डेटा पूरी तरह पारदर्शी होता है जिसे किसी भी स्तर पर बदला नहीं जा सकता. उन्होंने जानकारी दी कि पीएम 10 और पीएम 2.5 का डेटा हर घंटे और अन्य पैरामीटर्स का डेटा हर 5 मिनट में ऑनलाइन अपडेट होता है. यह डेटा सार्वजनिक है, छुपाया नहीं जा सकता. हमारी सरकार पारदर्शिता के साथ पालिसी बनाने में विश्वास करती है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (DTC) आज देश में लगभग 4000 ईवी बसों का सबसे बड़ा बेड़ा रखती है और 2028 तक 14,000 क्लीन फ्यूल बसों को दिल्ली में लाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही कूड़े के पहाड़ को खत्म करने, वेस्ट टू एनर्जी, मिस्ट स्प्रे, लिटर पिकर, मैकेनिकल रोड स्वीपर, एंटी स्मोग और ग्रीन कवर का विस्तार जैसे कदम लगातार उठाए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लंबी है, रोज़ काम करना होगा और हम करके रहेंगे. दिल्ली को बेहतर हवा भी देंगे और हरी-भरी दिल्ली भी बनाएंगे.

इस अवसर पर पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मॉनिटरिंग जितनी जरूरी है, इंफ़ोर्समेंट उतना ही जरूरी है. वायु रक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर लागू हों. उन्होंने बताया कि 2024 में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) में 233 पद रिक्त थे, जिनमें से 157 पद केवल 11 महीनों में भर दिए गए, जो पिछली 10 वर्षों की तुलना में लगभग दोगुना है.
उन्होंने कहा कि 1985 से दिल्ली की हवा देश स्तर का मुद्दा है. दिल्ली में 15 साल कांग्रेस और 10 साल आम आदमी पार्टी ने शासन किया, लेकिन किसी ने स्थायी समाधान नहीं निकाला. आज पहली बार पोल्युशन के सोर्स पर काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि प्रदूषण को केवल एक सेक्टर से नहीं, बल्कि वाहन, सड़क निर्माण, धूल नियंत्रण और पौधारोपण, सभी मोर्चों पर एकसाथ नियंत्रित किया जा रहा है.

राजधानी में 6 नए सीएएक्यूएमएस जेएनयू, इग्नू, एसपीएमएसपीसी तालकटोरा गार्डन, कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, दिल्ली कैंटोनमेंट और एनएसयूटी (वेस्ट कैंपस) में स्थापित किए गए हैं. इनके जुड़ने से दिल्ली में अब कुल 46 सीएएक्यूएमएस स्थापित हो चुके हैं, जो देश के किसी भी शहर से अधिक हैं. इन 46 स्टेशनों में से 30 दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), 10 भारत मौसम विज्ञान विभाग/आईआईटीएम, और 6 केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा संचालित किए जा रहे हैं. आने वाले समय में 14 और स्टेशन स्थापित किए जाएंगे.
कार्यक्रम में 100 ‘वायु रक्षक' की तैनाती की भी औपचारिक शुरुआत की गई, जो डीपीसीसी के साथ मिलकर ज़मीनी स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण सुनिश्चित करेंगे. इसके अतिरिक्त 600 वायु रक्षक दिल्ली पुलिस के सहयोग से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर निगरानी कर रहे हैं.
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