अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की तीसरी बहस के दौरान प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की भारत को लेकर की गई टिप्पणी देश में बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है. ट्रंप ने पेरिस के जलवायु परिवर्तन समझौते से हटने के अपने कदम का बचाव करते हुए बहस के दौरान भारत में "FilthyAir" का उल्लेख किया. इस पर ट्विटर #HowdyModi हैशटैग के साथ यूजर्स और कई विपक्षी नेताओं ने सरकार को घेरने की कोशिश की.पीएम मोदी ने पिछले साल रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ टेक्सास के शहर ह्यूस्टन में ट्रंप के साथ एक रैली की थी, जिसे "#HowdyModi!" नाम दिया गया था.
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने व्यंग्यात्मक लहजे में सरकार पर निशाना साधा. सिब्बल ने लिखा कि प्रधानमंत्री की पिछले साल सितंबर में अमेरिकी यात्रा (खासकर ह्यूस्टन रैली) के अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं. पीएम ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ रिश्तों का दावा किया था. लेकिन ट्रंप भारत में कोविड की मौतों पर सवाल खड़े कर रहे हैं. भारत की हवा को गंदा बताया और उसे टैरिफ किंग भी कहा. डोनाल्ड ट्रंप के कमेंट के बाद ही भारत में ट्विटर यूजर्स के बीच "#FilthyIndia" and "#HowdyModi" ट्रेंड करने लगा.
दिल्ली में प्रदूषण का बुरा हाल
एक ट्विटर यूजर ने कहा, ट्रंप गलत नहीं थे. उसने राजधानी दिल्ली और आसपास के प्रदूषण का स्तर बताने वाला एप और अमेरिका में प्रदूषण का हाल बताने वाले ऐसे ही एप के स्क्रीनशॉट जारी किए. इसमें दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 567 था, जबकि वाशिंगटन में यह महज 25 था. उसने लिखा कि सिर्फ प्रदूषणरहित दीपावली का ज्ञान देने की जरूरत नहीं है.
क्या ट्रंप के समर्थन पर पुनर्विचार होगा
वरिष्ठ शोधकर्ता और कॉलमिस्ट माइकेल कुगलमैन ने कहा, "क्या ट्रंप के भारत पर लगातार ऐसे बयानों के बाद क्या भारत के प्रधानमंत्री हाउडी मोदी के दौरान ट्रंप की उम्मीदवारी को दिए गए कथित समर्थन पर पुनर्विचार करेंगे?" एक यूजर्स ने लिखा कि ट्रंप ने भारत को गंदा कहा. जबकि उनके स्वागत के लिए देश में सौ करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. यह हमारे लिए फजीहत का विषय है. कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद और शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी.
एक यूजर्स ने सच भी सामने रखा
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि भारत और चीन भी भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन कर रहे हैं, उन पर भी अमेरिका की तरह अंकुश लगाया जाना चाहिए. हालांकि वाशिंगटन पोस्ट की जून की रिपोर्ट के हिसाब से प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन के मामले में चीन और अमेरिका के मुकाबले भारत कहीं पीछे है. भारत इस आधार पर 140वें और अमेरिका 14वें पायदान पर है.
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