
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन संसदीय चुनाव हर गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी विक्टर ओर्बन 16 साल से हंगरी पर राज कर रहे थे. हंगरी के चुनावों में कंजरवेटिव पीटर मैग्यार की तिज्सा पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की है. पीटर मैग्यार ने ओर्बन के 16 साल के शासन का अंत कर दिया ऐतिहासिक जीत हासिल की है. तिज्सा पार्टी ने संसदीय चुनावों में 199 सीटें जीत दो तिहाई बहुमत हासिल किया है. हंगरी के संसदीय चुनाव पर यूरोप के साथ ही अमेरिका की भी नजर थी.
विक्टर ओर्बन के लिए यह हार एक बड़ा झटका है. 62 वर्षीय ओर्बन दुनिया के उन चुनिंदा नेताओं में से थे, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ-साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भी करीबी माना जाता है. ऐसे में ट्रंप के लिए भी हंगरी में सत्ता परिवर्तन बड़ी चुनौती है. अब देखने वाली बात ये होगी कि पीटर मैग्यार, यूरोप और अमेरिका के बीच बेलैंस कैसे बिठाते हैं. हालांकि, यूरोपीय संघ के सदस्य और वकील मैग्यार ने ट्रंप के साथ अपने संबंधों पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है, लेकिन उन्होंने कई मौकों पर अमेरिकी राष्ट्रपति के बारे में ट्वीट किया है.
मैग्यार खुद ओर्बन के वफादार थे. उन्होंने फरवरी 2024 में फिडेज नेता से संबंध तोड़ लिए थे, जब एक ऐसे घोटाले का मामला सामने आया था, जिसमें बाल यौन शोषण को छिपाने के दोषी व्यक्ति को राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान दिया गया था. इस विवाद के चलते राष्ट्रपति कैटलिन नोवाक और मैग्यार की पूर्व पत्नी, न्याय मंत्री जुडिट वर्गा ने इस्तीफा दे दिया. मैग्यार ने सरकार पर 'महिलाओं की आड़ में छिपने' और शासन की रक्षा के लिए उनकी बलि देने का आरोप लगाया.
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हंगरी के संसदीय चुनावों में ओर्बन की हार के कई कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है. पिछले 3 साल से हंगरी की अर्थव्यवस्था काफी सुस्त है. अर्थव्यवस्था लगभग ठहर सी गई है. इससे लोगों का जीवन स्तर गिर रहा था, जिससे लोगों में काफी निराशा थी. ओर्बन पर ये भी आरोप लगे कि उन्होंने अपने करीबी उद्योगपतियों को मालामाल कर दिया, जिससे अमीरों और गरीबों में खाई लगातार बढ़ रही थी. मैग्यार की तिज्सा पार्टी ने लोगों की इसी दुखती रग पर हाथ रखा और जनता उनके साथ आकर खड़ी हो गई.
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