
Hungary Elections 2026: हंगरी की राजनीति में नया ऑर्डर सेट हो चुका है. बुडापेस्ट से लेकर वॉशिंगटन और मॉस्को तक इसकी चर्चाएं हैं. पिछले 16 साल से हंगरी की सत्ता पर काबिज और दक्षिणपंथी राजनीति के वैश्विक चेहरा माने जाने वाले विक्टर ओर्बन को चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. इस हार से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों को कूटनीतिक झटका लगा है.
हंगरी में विपक्षी नेता पीटर मैग्यार (Peter Magyar) और उनकी तिसा पार्टी ने चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए संसद की 199 सीटों में से 138 सीटों पर कब्जा कर लिया है. मैग्यार की यह जीत 'दो-तिहाई बहुमत' के साथ आई है. यह चुनाव केवल हंगरी की घरेलू राजनीति का नहीं, बल्कि इस बात का फैसला था कि हंगरी पश्चिम (यूरोप-अमेरिका) की ओर झुकेगा या रूस की की साये में रहेगा.

विक्टर ओर्बन (फाइल फोटो)
व्लादिमीर पुतिन के लिए विक्टर ओर्बन यूरोपीय संघ (EU) के भीतर सबसे भरोसेमंद 'मोहरे' की तरह थे. जब भी यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर प्रतिबंध लगाने या यूक्रेन को सैन्य सहायता देने की बात आती थी, ओर्बन अक्सर वीटो का इस्तेमाल कर यूरोपीय देशों की राह में रोड़ा अटका देते थे. द कन्वर्सेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में एक लीक हुई कॉल में ओर्बन ने खुद की तुलना एक ऐसे 'चूहे' से की थी जो पिंजरे में बंद 'रूसी शेर' (पुतिन) को आजाद कराने में मदद कर रहा है.
सिर्फ रूस ही नहीं, अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी यह हार व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से परेशान करने वाली है. ट्रंप ओर्बन को अपना आदर्श मानते रहे हैं और उन्होंने अक्सर ओर्बन की नीतियों की तारीफ की है. चुनाव से ठीक पहले ट्रंप प्रशासन के करीबी और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ओर्बन का समर्थन करने के लिए बुडापेस्ट का दौरा भी किया था. ट्रंप ने तो यहां तक वादा किया था कि वे अपनी पूरी आर्थिक शक्ति के साथ ओर्बन की मदद करेंगे.

पीटर मैग्यार (फाइल फोटो)
ओर्बन की हार का सबसे बड़ा कारण हंगरी की आंतरिक स्थिति रही. सालों तक सत्ता में रहने के बाद उनकी पार्टी 'फिडेस' (Fidesz) पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे. रिपोर्टों के मुताबिक, हंगरी यूरोप का सबसे भ्रष्ट देश बन चुका था. जहां एक तरफ देश की आम जनता महंगाई और आर्थिक मंदी से जूझ रही थी, वहीं ओर्बन के करीबी नेता आलीशान महलों में रह रहे थे. 2025 तक आते-आते हंगरी घरेलू संपत्ति के मामले में यूरोपीय संघ में सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया था.
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