
US Presential Election 2020: अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी और वर्जीनिया में वोटिंग शुरू हो गई है. चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump )और उनके डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन (Joe Biden) के बीच कड़े मुकाबले की संभावना है. यहां अब तक वोटिंग के दिन से पहले ही लाखों लोग मेल या बैलट के जरिए वोट कर चुके हैं. बैलट के जरिए अब तक 93 मिलियन यानी नौ करोड़ 30 लाख से लोग वोट कर चुके हैं, जो 2016 में पड़े कुल 138.8 मिलियन का दो तिहाई है. इस साल कुछ 239 मिलियन लोग वोट डालने के पात्र हैं.
ओपिनियन पोल के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन के बीच नहीं रहेगा वोटों का ज्यादा अंतर
गौरतलब है कि अमेरिका में राष्ट्रपति को नेशनल पॉपुलर वोट के जरिए 538 सदस्यीय इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए चुना जाता है, जिसमें हर उम्मीदवार को जीतने के लिए 270 का बहुमत चाहिए होता है.दरअसल, हर राज्य में एक निश्चित निर्वाचन प्रतिनिधि (इलेक्टोरल कॉलेज) होते हैं. मसलन कैलीफोर्निया में 55 निर्वाचक प्रतिनिधि तय हैं, प्रांत में जिसे सर्वाधिक वोट मिलेंगे, उसी के ये सारे इलेक्टोरल कॉलेज माने जाएंगे.
चुनावी सर्वेक्षणों की मानें तो ट्रंप और बाइडेन के बीच जीत का अंतर बहुत कम रहने वाला है. सर्वेक्षणों के अनुसार, जीते इन दोनों में से कोई भी, जीत का मार्जिन बहुत ज्यादा नहीं होगा. Real Clear Politics के अनुसार, प्रमुख राज्यों में 77 साल के बाइडेन 74 साल के ट्रंप से 2.9 फीसदी अंकों से आगे चल रहे हैं. यह अंक मार्जिन ऑफ एरर के तहत आता है. पिछले कुछ दिनों में बाइडेन के अंकों में कुछ गिरावट आई है. इस अवधि में राष्ट्रपति ट्रंप, फर्स्ट फैमिली और उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने खूब रैलियां की हैं. ट्रंप ने अकेले 15 रैलियां की हैं. सभी ने मिलकर पिछले 3 दिनों में कम से कम 40 रैलियां की हैं. दूसरी ओर, Real Clear Politics के मुताबिक, पूरे अमेरिका में ट्रंप बाइडेन के खिलाफ औसतन 6.5 फीसदी अंक से पीछे चल रहे थे. कुछ दिन पहले बाइडेन आठ अंकों से लीड कर रहे थे. सोमवार को अधिकतर मेनस्ट्रीम मीडिया का कहना है कि ट्रंप जीत के लिहाज से पिछड़ रहे हैं क्योंकि वो पेन्सिल्वेनिया, फ्लोरिडा, मिशिगन, एरिज़ोना और विस्कॉन्सिन जैसे प्रमुख राज्यों में लगातार पीछे ही बने हुए हैं. वहीं, कुछ का यह भी कहना है कि हमेशा रिपब्लिकन उम्मीदवार की ओर रुझान बनाए रखने वाला राज्य टेक्सास भी इस बार कुछ अलग कर सकता है.
रवीश कुमार का प्राइम टाइम : क्या कमला हैरिस अमेरिका की उपराष्ट्रपति बन जाएंगी?
चीन की दखल से चुनाव जीते थे बाइडेन- ट्रंप के इस आरोप की हवा उनकी अपनी सरकार निकाल चुकी
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहचीन ने की चोरी! अमेरिकी चुनाव के 22 करोड़ वोटर्स का डेटा उड़ाया- ट्रंप का बड़ा दावा
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहअमेरिका में चुनाव से पहले डर गए ट्रंप? इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के सभी 4 मेंबर को हटाया
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहFact Check: डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं. उनका आरोप है कि चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों की फाइलें गैर-कानूनी तरीके से हासिल कर ली थीं. लेकिन यह आरोप कितने सही हैं?
Donald Trump Primetime Speech on US Election Data: डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली 'इतनी खराब और कमजोर है कि इसे कोई नहीं बचा सकता.'
अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की ताकत और बढ़ गई है. इसी का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के सभी 4 मेंबर को हटा दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला की जीत के साथ कोलंबिया में दक्षिणपंथी राजनीति की फिर से सत्ता में वापसी हो गई है. इससे पहले 200 साल में केवल 4 साल ही दक्षिणपंथी सरकार रही है.
दो विश्व युद्ध और उसके बाद की दुनिया के युद्ध नतीजों और चुनाव नतीजों का हाल देख ट्रंप-नेतन्याहू को संभल जाना चाहिए.
हालिया रॉयटर्स/इप्सोस पोल के अनुसार, ट्रंप की रेटिंग इस कार्यकाल के सबसे निचले स्तर 36% पर पहुंच गई है, जिससे पार्टी को हाउस और सीनेट में बहुमत खोने का डर है.
LIVE: बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी आज कोलकाता और श्रीरामपुर में रैली कर सकते हैं. दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में तपती धूप और गर्मी से बुरा हाल है. पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है. देश-दुनिया का हर अपडेट यहां देखें.
Iran War: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक आ रहे हैं. ऐसे में ट्रंप पर युद्ध खत्म करने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है. इस युद्ध की वजह से पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं. जिसकी वजह से उनको आलोचना झेलनी पड़ रही है. शायद यही वजह है कि ट्रंप के मन में युद्ध खत्म करने का विचार आने लगा है.
हंगरी में विपक्षी नेता पीटर मैग्यार (Peter Magyar) और उनकी तिसा पार्टी ने चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए संसद की 199 सीटों में से 138 सीटों पर कब्जा कर लिया है.
हंगरी के संसदीय चुनाव में पीटर मैग्यार की तिज्सा पार्टी ने शानदार जीत दर्ज कर ओर्बन के 16 साल के शासन का अंत किया. विक्टर ओर्बन की हार का मुख्य कारण बढ़ती महंगाई और आर्थिक सुस्ती मानी जा रही है, जिससे जनता में निराशा थी.

