
Colombia President Election 2026: कोलंबिया के तीसरे सबसे बड़े शहर काली में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी झंडे जलाए और दंगा-रोधी पुलिस से झड़प की है. यह सब तब हुआ जब डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले कट्टर दक्षिणपंथी उम्मीदवार ने बहुत ही कम अंतर से कोलंबिया का राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है. न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने हजारों लोगों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया. भीड़ में कुछ लोग अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला की जीत से नाराज थे और उनके हाथों में ईंटें और लोहे की छड़ें थीं.
राष्ट्रपति चुनाव में लगभग सभी मतदान केंद्रों के नतीजे आने के बाद, अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला को 49.66 प्रतिशत वोट मिले, जबकि वामपंथी सीनेटर इवान सेपेदा को 48.70 प्रतिशत वोट मिले. 47 साल के अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला की जीत से अमेरिका के साथ कोलंबिया के खराब चल रहे रिश्तों में सुधार होने की संभावना है. साथ ही, यह उस लहर को भी आगे बढ़ाता है जिसमें पूरे लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी नेता सत्ता में आते जा रहे हैं.

जीत का जश्न मनाते अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला (फोटो- AFP)
कोलंबिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा कि आज कोलंबिया ने अपना सबसे महत्वपूर्ण मुकाबला जीत लिया है. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात हुई, जिन्होंने उन्हें जीत की बधाई दी और अपना समर्थन देने का भरोसा जताया.

चुनाव रिजल्ट आने के बाद कोलंबिया में हिंसा (फोटो- AFP)
अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला के पास अमेरिका और कोलंबिया दोनों देशों की नागरिकत है और वे खुद को "एल टिग्रे" (बाघ) कहते हैं. चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने AFP से कहा था कि वह विद्रोही समूहों के साथ चल रही शांति वार्ताएं खत्म कर देंगे. उन्होंने यह भी कहा था कि वह इन समूहों के खिलाफ अमेरिका के समर्थन से 90 दिनों तक हवाई हमलों का अभियान चलाएंगे.
बता दें कि फार्क गुरिल्ला गुट के साथ ऐतिहासिक शांति समझौता हुए 10 साल हो चुके हैं. इस दौरान कोलंबिया के कई हिस्सों में काफी विकास हुआ है. लेकिन आज भी ड्रग्स की तस्करी करने वाले गिरोह (कार्टेल) और विद्रोही समूह देश के कुछ इलाकों पर नियंत्रण रखते हैं. कोकीन का निर्यात अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है और कोलंबिया आज भी दुनिया के सबसे ज्यादा आर्थिक असमानता वाले देशों में से एक है.
भारत की चुनाव व्यवस्था के मुरीद हुए ट्रंप, बोले- 64.6 करोड़ वोटर्स के पास फोटो ID; अमेरिका में भी हों ये नियम
Written by: अजय कुमार पटेलExplainer: निकारागुआ में अब नहीं होंगे चुनाव, राष्ट्रपति ओर्टेगा के इस फैसले से क्यों मचा है वैश्विक बवाल?
Written by: अभिजीत श्रीवास्तवचीन की दखल से चुनाव जीते थे बाइडेन- ट्रंप के इस आरोप की हवा उनकी अपनी सरकार निकाल चुकी
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चुनावी मॉडल की तारीफ करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हर मतदाता के लिए वैध फोटो पहचान पत्र जरूरी है. उन्होंने अमेरिका में SAVE America Act पारित करने की मांग दोहराई.
निकारागुआ में चुनाव क्यों खत्म कर रहे हैं डेनियल ओर्टेगा? संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने निकारागुआ पर क्या कहा? ओर्टेगा के इस फैसले से निकारागुआ को लेकर दुनिया की चिंता क्यों बढ़ गई है?
Fact Check: डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं. उनका आरोप है कि चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों की फाइलें गैर-कानूनी तरीके से हासिल कर ली थीं. लेकिन यह आरोप कितने सही हैं?
Donald Trump Primetime Speech on US Election Data: डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली 'इतनी खराब और कमजोर है कि इसे कोई नहीं बचा सकता.'
अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की ताकत और बढ़ गई है. इसी का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के सभी 4 मेंबर को हटा दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला की जीत के साथ कोलंबिया में दक्षिणपंथी राजनीति की फिर से सत्ता में वापसी हो गई है. इससे पहले 200 साल में केवल 4 साल ही दक्षिणपंथी सरकार रही है.
दो विश्व युद्ध और उसके बाद की दुनिया के युद्ध नतीजों और चुनाव नतीजों का हाल देख ट्रंप-नेतन्याहू को संभल जाना चाहिए.
हालिया रॉयटर्स/इप्सोस पोल के अनुसार, ट्रंप की रेटिंग इस कार्यकाल के सबसे निचले स्तर 36% पर पहुंच गई है, जिससे पार्टी को हाउस और सीनेट में बहुमत खोने का डर है.
LIVE: बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी आज कोलकाता और श्रीरामपुर में रैली कर सकते हैं. दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में तपती धूप और गर्मी से बुरा हाल है. पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है. देश-दुनिया का हर अपडेट यहां देखें.
Iran War: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक आ रहे हैं. ऐसे में ट्रंप पर युद्ध खत्म करने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है. इस युद्ध की वजह से पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं. जिसकी वजह से उनको आलोचना झेलनी पड़ रही है. शायद यही वजह है कि ट्रंप के मन में युद्ध खत्म करने का विचार आने लगा है.
