
Donald Trump 2020 Election Claim: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर अमेरिकी चुनाव डेटा से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है. देश के नाम 25 मिनट के संबोधन में उन्होंने कहा कि वह सिस्टम में मौजूद "चौंकाने वाली कमियों" के बारे में खुफिया जानकारी सार्वजनिक कर रहे हैं. इसके तुरंत बाद व्हाइट हाउस ने यह डॉक्यूमेंट जारी करने शुरू कर दिए. ट्रंप ने इसके जरिए अपने उन दावों को और बल दे रहे हैं जिनमें वह लगातार कहते रहे हैं कि 2020 में उनकी हार की वजह थी कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई थी.
व्हाइट हाउस से देश के नाम प्राइम-टाइम टीवी संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "कई सालों के दौरान, 2020 के चुनाव के समय से ही, चीन ने इतिहास में चुनाव डेटा के साथ अब तक की सबसे बड़ी छेड़छाड़ की है. इसके कारण चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों की फाइलें गैर-कानूनी तरीके से हासिल कर लीं."
ट्रंप ने दावा किया कि चीन ने 2020 के चुनाव को कमजोर करने के मकसद से "इतिहास में चुनाव डेटा के साथ सबसे बड़ी छेड़छाड़" की और 'डीप स्टेट' के सदस्यों ने इसे छिपाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि डेटा का यह नुकसान चुनाव सुरक्षा के लिए एक अभूतपूर्व और भयानक खतरा पैदा करता है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का चुनाव सिस्टम एक सटीक और निष्पक्ष सिस्टम होने के मामले में "बुरी तरह विफल" रहा है।
उन्होंने कहा, "हर अमेरिकी को यह जानने का हक है कि जब वे अपना वोट डालते हैं, तो उस वोट की गिनती सिस्टम में सही ढंग से होगी, और मकसद उस सिस्टम को सुरक्षित बनाना है -- ऐसा सिस्टम जहां धोखाधड़ी और दखलअंदाजी न केवल मुश्किल हो, बल्कि लगभग असंभव हो... दुर्भाग्य से, आज हमारे पास जो सिस्टम है, वह उस मानक पर बुरी तरह विफल रहता है."
गौर करने वाली बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस भाषण में यह तो कहा कि अमेरिकी चुनावों में धांधली और चोरी हो सकती है, लेकिन उन्होंने असल में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं दिया या दावा नहीं किया कि 2020 के चुनाव में कोई वोट बदला या उसमें हेर-फेर की गई थी. हालांकि, उन्होंने यह दावा जरूर किया कि 2020 में वेनेजुएला के चुनाव में धांधली हुई थी.
अमेरिका में चीनी दूतावास ने ट्रंप के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है. दूतावास के प्रवक्ता लियू चांग ने कहा, "चीन हमेशा से दूसरों के आंतरिक मामलों में दखल न देने के सिद्धांत पर कायम रहा है. अमेरिकी चुनाव अमेरिका का आंतरिक मामला है. इसका नतीजा अमेरिकी लोगों के वोटों से तय होता है. चीन ने कभी भी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दखल नहीं दिया है और न ही कभी देगा."
चीन द्वारा अमेरिकी वोटरों का डेटा इकट्ठा करने के आरोप नए नहीं हैं. साइबर मामलों के नेशनल इंटेलिजेंस ऑफिसर की 2020 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चीनी खुफिया अधिकारियों ने "जनमत विश्लेषण" करने के लिए कई अमेरिकी राज्यों के वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा का विश्लेषण किया था. इस रिपोर्ट को 2022 में आंशिक रूप से (पूरा नहीं) सार्वजनिक किया गया था.
यह भी ध्यान रहे कि ट्रंप और उनके सहयोगियों ने 60 से ज्यादा मुकदमा दायर किया है लेकिन इनमें ऐसा कोई फैसला नहीं आया जिससे 2020 के चुनाव के नतीजों को बदलने लायक धोखाधड़ी साबित होती हो. वहीं दोबारा गिनती, ऑडिट और उनके अपने न्याय विभाग को भी ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं मिली.
डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे कई कथित सबूतों का जिक्र किया जिनसे यह साबित हो सके कि अमेरिका की चुनाव प्रणाली पूरी तरह से भ्रष्ट और बेकार हो चुकी है. उन्होंने इन सबूतों का इस्तेमाल यह दावा करने के लिए किया कि 2020 का चुनाव उन्होंने जीता था लेकिन वह उनसे छीन लिया गया था. ट्रंप इन आरोपों के जरिए दावा कर रहे हैं कि देश में नवंबर में होने जा रहा मध्यावधि चुनाव भी धांधली और चोरी की चपेट में आ सकते हैं, जब तक कि वोटिंग सिस्टम में ऐसे बड़े बदलाव न किए जाएं जिनसे वोटरों के लिए वोट डालना बहुत मुश्किल हो जाए.
ट्रंप ने एक मौके पर जोर देकर कहा कि अमेरिकी संसद को 'सेव अमेरिका एक्ट' जरूर पास करना चाहिए." उन्होंने इस कानून को एक समझदारी भरा सुधार बताया और कहा कि इससे रिपब्लिकन हर चुनाव जीत सकेंगे. राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मेल-इन बैलेट का तरीका ही गड़बड़ियों से भरा है और उन्होंने इस प्रक्रिया पर लगभग पूरी तरह रोक लगाने की मांग की.
राष्ट्रपति ट्रंप ने उन नेटवर्क्स से ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस वापस लेने की भी मांग की, जिन्होंने चुनाव में धोखाधड़ी पर उनके प्राइम-टाइम भाषण को लाइव दिखाने से इनकार कर दिया. उन्होंने बिना किसी आधार के आरोप लगाया कि वे चुनाव में धांधली की कोशिशों में शामिल हैं. उन्होंने ABC और NBC का नाम लेते हुए कहा, "वे और मीडिया के दूसरे लोग एक साजिश का हिस्सा हैं. इस तरह की धोखाधड़ी के लिए उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाने चाहिए. वे अरबों डॉलर की कीमत वाली हमारी पब्लिक एयरवेव्स का इस्तेमाल बिना किसी पैसे के करते हैं. वे कुछ भी भुगतान नहीं करते हैं."
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