
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज से 6 साल पहले राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन के हाथों मिली हार को पचा नहीं पा रहे हैं. ट्रंप ने एक बार फिर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली और विदेशी दखल के दावों को दोहराया है. देश के नाम दिए गए अपने भाषण में उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने अमेरिका के करोड़ों मतदाताओं का डेटा चुरा लिया था. उन्होंने यह भी इशारा किया कि वेनेजुएला अमेरिकी वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी कर सकता है. सवाल है कि ट्रंप के यह आरोप कितने सही हैं. चलिए ट्रंप के आरोपों का फैक्ट चेक करते हैं, उनकी अपनी एजेंसियों ने ही इन आरोपों पर क्या जांच करके पता किया है, इसे जानेंगे. साथ ही समझेंगे कि ट्रंप अभी ऐसे आरोप क्यों लगा रहे हैं, उनकी मंशा पर क्यों सवाल उठ रहे हैं.
AFP की रिपोर्ट के अनुसार 2020 के चुनाव के बाद 60 से ज्यादा मुकदमों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि चुनाव में कोई धांधली हुई थी या नतीजा बदल गया था. चुनाव अधिकारियों और खुद ट्रंप की अपनी सरकार के कई अधिकारियों ने भी बार-बार उनके इन दावों को खारिज किया था. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के चुनाव कानून एक्सपर्ट रिक हैसन ने AFP से कहा कि ट्रंप के भाषण में ज्यादा वही पुराने दावे थे, जिन्हें पहले ही गलत साबित किया जा चुका है.
ट्रंप ने आरोप लगाया कि चीन ने "इतिहास की सबसे बड़ी चुनावी डेटा चोरी" की और अवैध तरीके से अमेरिका के 22 करोड़ मतदाताओं की फाइलें हासिल कर लीं. बाद में उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन ने जो बाइडेन के लिए अवैध बैलेट (मतपत्र) बनाने की कोशिश की. लेकिन सच्चाई तो यही है कि अमेरिका में मतदाताओं की फाइलें ज्यादातर सार्वजनिक रिकॉर्ड होती हैं. राज्यों के लिए इन्हें रखना जरूरी होता है और इन्हें नियमित रूप से बेचा भी जाता है. ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन पर यह आरोप लगाना गलत है कि उसने 22 करोड़ मतदाताओं की फाइलें हासिल कीं.
खुद मार्च 2021 में अमेरिका की प्रमुख खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट सार्वजनिक की गई थी, जिसमें कहा गया था कि ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि किसी दूसरे ने वोटिंग प्रक्रिया के तकनीकी हिस्से में बदलाव करने की कोशिश की हो. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि एजेंसियों को पूरे भरोसे के साथ यह निष्कर्ष मिला कि चीनी सरकार ने चुनाव में दखल नहीं दिया और चुनाव का नतीजा बदलने की कोशिश भी नहीं की.
सरकार की एक दूसरी जांच में भी यह निष्कर्ष निकला कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि किसी विदेशी सरकार से जुड़े व्यक्ति या संगठन ने चुनाव से छेड़छाड़ की हो. अब मैरिकोपा काउंटी के पूर्व रिकॉर्डर स्टीफन रिचर ने X पर लिखा कि अगर हजारों फर्जी मतदाता बनाने की साजिश होती, तो उसके लिए नकली सोशल सिक्योरिटी रिकॉर्ड, नकली पते और नकली पहचान बनानी पड़ती, और यह सब बिना पकड़े जाना लगभग नामुमकिन होता.
ट्रंप ने दावा किया कि पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन में वेनेजुएला के चुनावों में धांधली हुई और उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका की वोटिंग मशीनों में भी ऐसी गड़बड़ी हो सकती है. 2020 में भी ट्रंप के समर्थकों ने ऐसे दावे फैलाए थे. उनका आरोप था कि चुनावी सॉफ्टवेयर कंपनी स्मार्टमैटिक की मदद से वेनेजुएला ने अमेरिकी वोट बदल दिए.
लेकिन स्मार्टमैटिक की तकनीक 2020 के चुनाव में सिर्फ एक ऐसे काउंटी में इस्तेमाल हुई थी, जहां चुनाव में कोई मुकाबला ही नहीं था. बाद में कंपनी ने इन झूठे आरोपों को लेकर मानहानि के मामलों में समझौते और कानूनी जीत भी हासिल की.
गुरुवार को भी व्हाइट हाउस द्वारा जारी दस्तावेजों में कहा गया कि वेनेजुएला के अधिकारियों की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम में गहरी रुचि थी और शायद उनके पास कुछ क्षमता भी थी. लेकिन खुफिया जानकारी यह पक्के तौर पर साबित नहीं कर सकी कि वेनेजुएला के किसी चुनाव में बड़े स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक धांधली सफलतापूर्वक की गई थी. दस्तावेजों में यह भी कहा गया कि स्मार्टमैटिक और वेनेजुएला सरकार के पास वेनेजुएला के बाहर किसी चुनाव का नतीजा बदलने की क्षमता नहीं थी.
यानी ट्रंप की ओर से जो डॉक्यूमेंट पेश किए गए हैं, उनमें भी वोटों से छेड़छाड़ का कोई सबूत नहीं है.
अगर डोनाल्ड ट्रंप की पुरानी बातों को देखें, तो जब भी किसी चुनाव का नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया, उन्होंने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है. ऐसे ही दावों के बाद 6 जनवरी 2021 को अमेरिका में हिंसा भी हुई थी. इसलिए मध्यावधि चुनाव से चार महीने पहले दिया गया उनका यह भाषण कई लोगों की चिंता बढ़ा रहा है. CNN की रिपोर्ट के अनुसार एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप यह चुनाव हारे तो इन्हीं आरोपों के आधार पर नतीजों को नकारेंगे.
ट्रंप ने अपने भाषण में भी साफ संकेत दिया है कि अगर संसद ने उनकी मांग वाला चुनावी कानून "सेव अमेरिका एक्ट" पास नहीं किया, तो वह मध्यावधि चुनाव को भी धांधली वाला बता सकते हैं. ट्रंप ने कहा, "सबसे जरूरी बात यह है कि चुनाव की सुरक्षा से जुड़े इस संकट को दूर करने के लिए कांग्रेस (संसद) को सेव अमेरिका एक्ट पास करना ही होगा."
लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि यह कानून कांग्रेस से पास हो पाएगा. ट्रंप की अपनी पार्टी के कई बड़े नेताओं ने भी उन्हें यह बात मानने की सलाह दी है. अगर कांग्रेस ने यह कानून पास नहीं किया और 2026 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी हार गई, तो कई लोगों का मानना है कि ट्रंप फिर चुनाव में धांधली का आरोप जरूर लगाएंगे.
(इनपुट- एएफपी)
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