
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को उम्मीद जताई अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का परिणाम चाहे जो भी हो, भारत-अमेरिका संबंध लगातार बढ़ते रहेंगे. कैनबरा में संसद भवन में ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, जयशंकर ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2017 में क्वाड गठबंधन में फिर से जान डालने का श्रेय दिया, जो भारत-पैसिफिक सहयोग में एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट था.
जयशंकर ने यह पूछे जाने पर कि यूएस प्रेसिडेंशियल इलेक्शन के बाद भारत-अमेरिका संबंध किस प्रकार विकसित होंगे, उन्होंने कहा, 'हमने पिछले पांच राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में अमेरिका के साथ अपने संबंधों में स्थिर प्रगति देखी है, जिसमें ट्रंप का पिछला कार्यकाल भी शामिल है.' उन्होंने कहा, 'इसलिए, जब हम अमेरिकी चुनाव को देखते हैं, तो हमें विश्वास है कि परिणाम चाहे जो भी हो, अमेरिका के साथ हमारे संबंध बढ़ते रहेंगे.'
बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए 5 नवंबर को वोट डाले जाने हैं. चुनाव परिणाम बुधवार सुबह तक घोषित किया जा सकता है. हालांकि देरी संभव है, कभी-कभी परिणामों को अंतिम रूप देने में कई दिन, सप्ताह या एक महीने भी लग सकते हैं.
विदेश मंत्री जयशंकर वर्तमान में दो देशों की यात्रा पर हैं, 7 नवंबर तक ऑस्ट्रेलिया में रहेंगे और 8 नवंबर को सिंगापुर का दौरा करेंगे. वह रविवार को ब्रिस्बेन पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया और एक नए वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया.
अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने आस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ 15वें विदेश मंत्रियों की फ्रेमवर्क डायलॉग (एफएमएफडी) की सह-अध्यक्षता की. बैठक के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने पोस्ट किया, 'आज कैनबरा में विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ 15वीं भारत-ऑस्ट्रेलिया विदेश मंत्रियों की फ्रेमवर्क डायलॉग संपन्न हुआ. हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार बढ़ रही है. यह मजबूत राजनीतिक संबंधों, मजबूत रक्षा और सुरक्षा सहयोग, विस्तारित व्यापार, अधिक गतिशीलता और गहन शैक्षिक संबंधों में परिलक्षित होती है. हमारे संबंधित पड़ोस, इंडो-पैसिफिक, पश्चिम एशिया, यूक्रेन और वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की.'
ये भी पढ़ें :- अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में यदि डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस में हुआ टाई तब क्या होगा
चीन की दखल से चुनाव जीते थे बाइडेन- ट्रंप के इस आरोप की हवा उनकी अपनी सरकार निकाल चुकी
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहचीन ने की चोरी! अमेरिकी चुनाव के 22 करोड़ वोटर्स का डेटा उड़ाया- ट्रंप का बड़ा दावा
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहअमेरिका में चुनाव से पहले डर गए ट्रंप? इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के सभी 4 मेंबर को हटाया
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहFact Check: डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं. उनका आरोप है कि चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों की फाइलें गैर-कानूनी तरीके से हासिल कर ली थीं. लेकिन यह आरोप कितने सही हैं?
Donald Trump Primetime Speech on US Election Data: डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली 'इतनी खराब और कमजोर है कि इसे कोई नहीं बचा सकता.'
अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की ताकत और बढ़ गई है. इसी का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के सभी 4 मेंबर को हटा दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला की जीत के साथ कोलंबिया में दक्षिणपंथी राजनीति की फिर से सत्ता में वापसी हो गई है. इससे पहले 200 साल में केवल 4 साल ही दक्षिणपंथी सरकार रही है.
दो विश्व युद्ध और उसके बाद की दुनिया के युद्ध नतीजों और चुनाव नतीजों का हाल देख ट्रंप-नेतन्याहू को संभल जाना चाहिए.
हालिया रॉयटर्स/इप्सोस पोल के अनुसार, ट्रंप की रेटिंग इस कार्यकाल के सबसे निचले स्तर 36% पर पहुंच गई है, जिससे पार्टी को हाउस और सीनेट में बहुमत खोने का डर है.
LIVE: बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी आज कोलकाता और श्रीरामपुर में रैली कर सकते हैं. दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में तपती धूप और गर्मी से बुरा हाल है. पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है. देश-दुनिया का हर अपडेट यहां देखें.
Iran War: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक आ रहे हैं. ऐसे में ट्रंप पर युद्ध खत्म करने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है. इस युद्ध की वजह से पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं. जिसकी वजह से उनको आलोचना झेलनी पड़ रही है. शायद यही वजह है कि ट्रंप के मन में युद्ध खत्म करने का विचार आने लगा है.
हंगरी में विपक्षी नेता पीटर मैग्यार (Peter Magyar) और उनकी तिसा पार्टी ने चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए संसद की 199 सीटों में से 138 सीटों पर कब्जा कर लिया है.
हंगरी के संसदीय चुनाव में पीटर मैग्यार की तिज्सा पार्टी ने शानदार जीत दर्ज कर ओर्बन के 16 साल के शासन का अंत किया. विक्टर ओर्बन की हार का मुख्य कारण बढ़ती महंगाई और आर्थिक सुस्ती मानी जा रही है, जिससे जनता में निराशा थी.

