
अमेरिका में ह्वाइट हाउस की रेस अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. पांच नवंबर को होने वाले मतदान से पहले हो रहे सर्वेंक्षणों में दोनों उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर चल रही है. ताजा सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप पर एक फीसदी से अधिक की बढ़त बनाए हुए हैं. इसमें अगले कुछ दिनों में बदलाव आने की संभावना है.इसे देखते हुए अंतिम दिनों में दोनों खेमे जमकर जोर लगा रहे हैं.यह चुनाव कोई भी जीते,लेकिन दो में से एक रिकॉर्ड का बनना तय है. आइए जानते हैं कि ये रिकॉर्ड क्या हैं और वो मुद्दे कौन से हैं जो इस चुनाव की दिशा तय कर रहे हैं.
इस राष्ट्रपति चुनाव में अगर डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो वे अमेरिकी इतिहास के सबसे बुजुर्ग राष्ट्रपति होंगे. वहीं अगर भारतीय मूल की कमला हैरिस चुनी जाती हैं तो वो अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति होंगी.

अमेरिका के इस राष्ट्रपति चुनाव में महिलाएं बहुत महत्वपूर्ण हैं. यही वजह है कि गर्भपात इस राष्ट्रपति चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनकर मुद्दा है.डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस के बीच 10 सितंबर 2024 को हुई पहली टीवी बहस में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था. एक तरफ जहां रिपब्लिकन ट्रंप छह हफ्ते से अधिक के गर्भपात पर पाबंदी चाहते हैं. वहीं डेमोक्रेट कमला हैरिस महिला के अधिकारों का समर्थन करते हुए गर्भपात का अधिकार महिलाओं को देने की पक्षधर हैं.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में एक फैसला सुनाया था. इसके बाद वहां के कई राज्यों में गर्भपात और उसमें इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर रोक लगाई गई थी.लेकिन महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस पाबंदी को गलत बताया था.अब राष्ट्रपति चुनाव के दौरान इस मामले को महिला वोटरों के बीच निजता और स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है.

आंकड़े बताते हैं कि 1994 से 2022 के बीच अमेरिका में हुए चुनावों में 18 से 64 साल तक की महिला मतदाता वोटिंग में पुरुषों से आगे रही हैं. प्रजनन के लिहाज से यह महिलाओं का सक्रिय आयुवर्ग है. इस आयुवर्ग की महिलाएं गर्भपात जैसे मुद्दे पर संवेदनशील हैं.इसे ध्यान में रखते हुए ही कमला हैरिस और उनकी पार्टी ने महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए ट्रंप पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों और गर्भपात के मुद्दे को हवा दे रहा है.यही वजह है कि महिला मतदाताओं में कमला हैरिस का समर्थन अधिक देखा जा रहा है. वहीं दूसरी ओर ट्रंप खेमा महिला मतदाताओं को लुभाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा है.ट्रंप महिलाओं की मौजूदगी में गर्भपात जैसे मुद्दे पर बोल रहे हैं.
अमेरिका में अब तक भले ही कोई महिला राष्ट्रपति न बनी हो, लेकिन महिलाएं मतदान में पुरुषों से अधिक बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं.आंकड़े बताते हैं कि बीते चार दशक में हुए राष्ट्रपति चुनावों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक रही है. इतना ही नहीं 1994 को छोड़कर अमेरिका में 1980 से अब तक पंजीकृत मतदाताओं में महिलाओं का ही पलड़ा भारी रहा है. यह संयोग ही होगा कि डोनल्ड ट्रंप जब 2016 में राष्ट्रपति चुने गए तो उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन कराया था. वहीं इस बार एक बार फिर जब वो ह्वाइट हाउस की रेस में दौड़ रहे हैं तो, उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस से है. इस बार बाजी किसके हाथ लगती है, इसे जानने के लिए हमें पांच नवंबर तक का इंतजार करना होगा.
ये भी पढ़ें: डेमचोक और देपसांग में डिसइंगेजमेंट पूरा, पीछे हटी भारत-चीन की सेना : सूत्र
अमेरिका में हनुमान जी की 90 फीट ऊंची मूर्ति तोड़ने की धमकी, चुनाव से पहले हिंदू के खिलाफ नफरत कौन फैला रहा?
Edited by: आशुतोष कुमार सिंहट्रंप को मध्यावधि चुनाव में रोकने की सीक्रेट साजिश! अमेरिकी मीडिया का दावा- करीबी लोग ही नहीं चाहते जीत
Written by: Devbrat Tiwari, Edited by: चंदन सिंह राजपूत"ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा साम्राज्य खड़ा कर रहे हैं AI दिग्गज", मशहूर इतिहासकार की चेतावनी!
Written by: सुधांशु शुभमअमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति को मिडटर्म चुनावों से पहले राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया गया है. टेक्सास के शुगर लैंड में अष्टलक्ष्मी मंदिर में लगी ‘स्टैच्यू ऑफ द यूनियन’ नाम की यह मूर्ति अगस्त 2024 में स्थापना के बाद से ही विवाद के केंद्र में है.
फॉक्स न्यूज की होस्ट लॉरा इंग्राहम ने दावा किया कि कुछ रिपब्लिकन नेता 2026 के मिडटर्म चुनाव में हार से भी परहेज नहीं करेंगे ताकि उन्हें ट्रंप के एजेंडे को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी से राहत मिल सके.
इतिहासकार William Dalrymple ने चेतावनी दी है कि आज की बड़ी अमेरिकी Tech और AI कंपनियां ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह ही बेहद शक्तिशाली 'कंपनी-राज्य' बनती जा रही हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले नियम बदल दी थी, उनकी सरकार कह रही थी कि इनका मकसद चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाना है. लेकिन राज्यों का कहना था कि वोटिंग शुरू होने के इतने करीब इस तरह के बदलाव लागू करना संभव नहीं है.
ट्रंप का हर अमेरिकी को 5,000 डॉलर देने का वादा कितना सच, कितना कानूनी? जीत के बाद पैसा कहां से आएगा
डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ईरान जंग में उलझी हुई है, अमेरिका में तेल महंगा हुआ पड़ा है. ऐसे में मिडटर्म चुनावों में ट्रंप की पार्टी डेमोक्रेट्स के मुकाबले संघर्ष कर रही है. ट्रंप अब वोटरों को रिझाने का नया तरीका लेकर आए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद ईरान से जुड़ा युद्ध समाप्त हो जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान सत्ता परिवर्तन की उम्मीद में संघर्ष को लंबा खींच रहा है और उसका अंतिम लक्ष्य परमाणु हथियार हासिल करना है.
जेडी वेंस ने ओहियो में एक रैली के दौरान शरिया कानून पर अल सईद की पुरानी टिप्पणियों की आलोचना की थी. जिसके बाद अल सईद ने उनकी पत्नी उषा वेंस को इस वार-पलटवार में घसीट लिया.
अमेरिका में कड़े चुनावी कानूनों की पैरवी करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनावी सिस्टम की तारीफ की है. इसके साथ ही उन्होंने 'सेव अमेरिका एक्ट' पास कराने की मांग की है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चुनावी मॉडल की तारीफ करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हर मतदाता के लिए वैध फोटो पहचान पत्र जरूरी है. उन्होंने अमेरिका में SAVE America Act पारित करने की मांग दोहराई.
