
अमेरिका में 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. ट्रंप और कमला हैरिस दोनों ही पूरी तरह से (US President Election 2024) तैयार हैं. पुराने रिकॉर्ड से तो यही लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कभी भी नियमों का पालन नहीं किया है. चार साल पहले उन्होंने धोखाधड़ी की बात कहते हुए राष्ट्रपति चुनाव में मिली हार को स्वीकार नहीं किया था. अब इस बात की संभावना जताई जा रही है कि इस बार भी चुनाव के बाद वह कुछ ऐसा ही कर सकते हैं.
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इस बार अंतर ये होगा कि ट्रंप के पास राष्ट्रपति पद की शक्तियां नहीं होगी, जैसे कि उनके पास 2020 के चुनावों में थीं. साथ ही खास बात ये भी है कि अमेरिका में चुनाव रिजल्ट को प्रभावित करने और इसे कठिन बनाने के लिए नए कानून लागू किए गए हैं. ऐसे में किसी को बी ऐसा करने से पहले सोचना होगा.
ट्रंप ने सितंबर में मिशिगन रैली में कहा, "अगर मैं चुनाव हार गया तो आपको बताऊंगा कि क्या, यह संभव है. क्योंकि वे लोग धोखा देते हैं. इसी एकमात्र तरीके से हम हार सकते हैं. साल 2020 के चुनावों में हार के बाद ट्रंप की टीम ने 60 से ज्यादा मुकदमे दायर किए थे, लेकिन उनमें से कोई भी वोटों की गिनती में बदलाव या देरी करने में कामयाब नहीं हो सका.
डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों ने 2020 का राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद चुनाव रिजल्ट को पलटने के लिए काफी कोशिशें की थीं. उन्होंने प्रचार तकनीक के जरिए चुनावी धोखाधड़ी और धांधली के निराधार दावे भी किए थे.
चुनाव विवादों की संभावित आशंका को लेकर रिपब्लिकन ने100 से ज्यादा मुकदमे दायर किए हैं. ये मुकदमे चुनाव के बाद की चुनौतियों के लिए एक आधार स्थापित करने की कोशिश हैं. दोनों ही दल वोट और काउंटिंग पर कड़ी नजर रखने के लिए हजारों वॉलेंटियर्स को तैनात करने की तैयारी कर हे हैं. इन वॉलेंटियर्स को किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर रिपोर्ट करने का काम सौंपा जाएगा. हालांकि, कुछ वोटिंग राइट सपोर्टर्स चिंता जता रहे हैं कि चुनाव पर नजर रखने वाली इस प्रक्रिया को रिपब्लिकन बाधित कर सकते हैं.
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